This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Friday, July 12, 2013
एक
- एक क्षण में लोग मर रहें हैं। यमालय की ओर जा रहे हैं। लेकिन जो लोग
लाशें जलाने या फूँकने जाते हैं, वे समझते हैं - हमको थोड़े ही मरना है
अभी। वह पूरे जीवन की प्लानिंग { planning } कर रहा है इससे बड़ा कोई
आश्चर्य हो सकता है। मुर्खता का अंतिम स्वरूप है यह।
मनुष्यों----- तुमको मनुष्य शरीर मिल गया है, इसका लाभ उठा लो। यह करोड़ों जन्म में मिला है।
जन्मान्तर सहस्त्रैस्तुमनुष्यत्वं हि दुर्लभम।
{ महाभारत }
जल्दी अपनी काम बना लो। भगवान् के शरणापन्न हो जाओ। संत के द्वारा समझकर अपना कल्याण करो।
वेद कहता है ----
इह चेदशकद् बौद्धम प्राक शरीरस्य विस्त्रसः
ततः सर्गेषु लोकेषु शरीरत्वाय कल्पते।
{ कठोपनिषद }
ऐ मनुष्यों --------ये मनुष्य शरीर पाकर ईश्वर भक्ति करके अपना लक्ष्य
प्राप्त कर लो। नहीं तो 'सर्गेषु' [ करोड़ों ] बार चौरासी लाख योनियों में
घूमना पड़ेगा।
--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
एक
- एक क्षण में लोग मर रहें हैं। यमालय की ओर जा रहे हैं। लेकिन जो लोग
लाशें जलाने या फूँकने जाते हैं, वे समझते हैं - हमको थोड़े ही मरना है
अभी। वह पूरे जीवन की प्लानिंग { planning } कर रहा है इससे बड़ा कोई
आश्चर्य हो सकता है। मुर्खता का अंतिम स्वरूप है यह।
मनुष्यों----- तुमको मनुष्य शरीर मिल गया है, इसका लाभ उठा लो। यह करोड़ों जन्म में मिला है।
जन्मान्तर सहस्त्रैस्तुमनुष्यत्वं हि दुर्लभम।
{ महाभारत }
जल्दी अपनी काम बना लो। भगवान् के शरणापन्न हो जाओ। संत के द्वारा समझकर अपना कल्याण करो।
वेद कहता है ----
इह चेदशकद् बौद्धम प्राक शरीरस्य विस्त्रसः
ततः सर्गेषु लोकेषु शरीरत्वाय कल्पते।
{ कठोपनिषद }
ऐ मनुष्यों --------ये मनुष्य शरीर पाकर ईश्वर भक्ति करके अपना लक्ष्य प्राप्त कर लो। नहीं तो 'सर्गेषु' [ करोड़ों ] बार चौरासी लाख योनियों में घूमना पड़ेगा।
--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
मनुष्यों----- तुमको मनुष्य शरीर मिल गया है, इसका लाभ उठा लो। यह करोड़ों जन्म में मिला है।
जन्मान्तर सहस्त्रैस्तुमनुष्यत्वं हि दुर्लभम।
{ महाभारत }
जल्दी अपनी काम बना लो। भगवान् के शरणापन्न हो जाओ। संत के द्वारा समझकर अपना कल्याण करो।
वेद कहता है ----
इह चेदशकद् बौद्धम प्राक शरीरस्य विस्त्रसः
ततः सर्गेषु लोकेषु शरीरत्वाय कल्पते।
{ कठोपनिषद }
ऐ मनुष्यों --------ये मनुष्य शरीर पाकर ईश्वर भक्ति करके अपना लक्ष्य प्राप्त कर लो। नहीं तो 'सर्गेषु' [ करोड़ों ] बार चौरासी लाख योनियों में घूमना पड़ेगा।
--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
O
mind! It is selfish desire which drives the entire world. Take a
bumblebee, which hovers around a flower humming in appreciation as long
as it emits fragrance. But, when that same flower withers and falls to
the ground, the bee will not even look at it, even by mistake.
Similarly, one’s son, wife, friend, husband or any other worldly
relation, maintains their relationship with you simply to fulfil their
own selfish ends. This fact needs to be pondered over deeply.
.........JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
.........JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
Tuesday, July 9, 2013
"अरे
कृतघ्न मन! धिक्कार है तुझे! जिसने तुझ नीच,अकिंचन व अधम को अपने
श्रीचरणों में स्थान दिया, तूने उस शरण्य की कृपा को भुला दिया। उनको ही
दुखी करने लगा। सच है जहाँ कृपालुता, क्षमाशीलता की पराकाष्ठा है, वहीं
तूने अधमता व अपराधशीलता की पराकाष्ठा की है। क्यों न आज से तू अपने प्यारे
प्रभु को ही प्रसन्न करने का एक मात्र बीड़ा उठाकर चल।"
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...
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Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
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गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...

![एक - एक क्षण में लोग मर रहें हैं। यमालय की ओर जा रहे हैं। लेकिन जो लोग लाशें जलाने या फूँकने जाते हैं, वे समझते हैं - हमको थोड़े ही मरना है अभी। वह पूरे जीवन की प्लानिंग { planning } कर रहा है इससे बड़ा कोई आश्चर्य हो सकता है। मुर्खता का अंतिम स्वरूप है यह।
मनुष्यों----- तुमको मनुष्य शरीर मिल गया है, इसका लाभ उठा लो। यह करोड़ों जन्म में मिला है।
जन्मान्तर सहस्त्रैस्तुमनुष्यत्वं हि दुर्लभम।
{ महाभारत }
जल्दी अपनी काम बना लो। भगवान् के शरणापन्न हो जाओ। संत के द्वारा समझकर अपना कल्याण करो।
वेद कहता है ----
इह चेदशकद् बौद्धम प्राक शरीरस्य विस्त्रसः
ततः सर्गेषु लोकेषु शरीरत्वाय कल्पते।
{ कठोपनिषद }
ऐ मनुष्यों --------ये मनुष्य शरीर पाकर ईश्वर भक्ति करके अपना लक्ष्य प्राप्त कर लो। नहीं तो 'सर्गेषु' [ करोड़ों ] बार चौरासी लाख योनियों में घूमना पड़ेगा।
--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।](https://m.ak.fbcdn.net/sphotos-a.ak/hphotos-ak-prn2/s403x403/270512_476599732430881_885378389_n.jpg)




