Friday, July 12, 2013

THE PATH OF 'BHAKTI' IS SO SIMPLE THAT YOU SIMPLY SIT IN THE 'BOAT OF BHAKTI' AND 'KRISHN' WILL NAVIGATE YOU TO HIS 'DIVINE ABODE'.
---JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.
"Desire for the world cannot be destroyed so divert them towards the supreme God."
------SHRI MAHARAJJI.
Worldly desires are the root cause of all miseries, as fulfilment of desires leads to greed and unfulfilment to anger.
.........SHRI MAHARAJ JI.

Tuesday, July 9, 2013

"अरे कृतघ्न मन! धिक्कार है तुझे! जिसने तुझ नीच,अकिंचन व अधम को अपने श्रीचरणों में स्थान दिया, तूने उस शरण्य की कृपा को भुला दिया। उनको ही दुखी करने लगा। सच है जहाँ कृपालुता, क्षमाशीलता की पराकाष्ठा है, वहीं तूने अधमता व अपराधशीलता की पराकाष्ठा की है। क्यों न आज से तू अपने प्यारे प्रभु को ही प्रसन्न करने का एक मात्र बीड़ा उठाकर चल।"
"हरि एवं गुरु से जितना विशुद्ध प्रेम होगा,उतना ही संसार से सच्चा वैराग्य होगा।"
........श्री महाराजजी।
"सदा गुरु की आज्ञा ही मानो सब आज्ञा काट के। ईश्वरीय जगत में हर काम मनसा(मन का) से ही नोट होता है, work देखा ही नहीं जाता। हमारा idea जहाँ आया वहाँ गड़बड़ हुआ।"
जरा सोचो यह जीवन क्षणभंगुर है। अतः यदि कल का दिन ना मिला तो इतनी बड़ी गुरु - कृपा, भगवत्कृपा, सौभाग्य, सब व्यर्थ हो जायेगा। बार - बार सोचो , बार - बार सोचो।
........श्री कृपालु जी महाराज।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...