Friday, August 2, 2013

THE 'VEDAS' SAY THAT 'BHAKTI' IS THE ONLY SUPREME PATH TO GOD.'THE GITA' SAYS THAT 'SELFLESS BHAKTI' ENSURES "DIVINE VISION,DIVINE KNOWLEDGE,AND DIVINE UNITY" WITH THE SUPREME FORM OF GOD,'KRISHN'.AND THE 'BHAGWATAM' TELLS US THAT TO ATTAIN THE NECTAR OF THE BLISS OF 'KRISHN LOVE' THROUGH BHAKTI(DIVINE-LOVE-CONSCIOUSNESS) AND KEEP ON DRINKING IT FOREVER.
-----FIFTH ORIGINAL JAGADGURU SWAMI SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.
JUST AIM AND FOCUS ON SHRI MAHARAJJI AND FORGET EVERYTHING.RADHEY-RADHEY.
A day of worry is more exhausting than a day of work. People get so busy worrying about yesterday or tomorrow, they forget about today. And today is what you have to work with.
ये हरि-गुरु की इच्छा पर छोड़ दो कि वो कब क्या देते हैं,मिलन या वियोग। देने में भी विज्ञान है।अतएव वे जब जो कल्याणार्थ समझेंगे देंगे।
........श्री महाराजजी।
आँसू बहाने से अन्तःकरण शुद्ध होगा, याद कर लो सब लोग, रट लो ये कृपालु का वाक्य। भोले बालक बनकर रोकर पुकारो, राम दौड़े आयेंगे। सब ज्ञान फेंक दो, कूड़ा-कबाड़ा जो इकट्ठा किया है। अपने को अकिंचन, निर्बल, असहाय, दींन हीन, पापात्मा महसूस करो, भीतर से, तब आँसू की धार चलेगी, तब अन्तःकरण शुद्ध होगा, तब गुरु कृपा करेगा। गुरु की कृपा से राम के दर्शन होंगे, राम का प्यार मिलेगा और सदा के लिये आनन्दमय हो जाओगे.

-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
मेरे केवल इसी वचन पर विशवास कर लो.......
भगवान् की इतनी बड़ी कृपा है कि वे कहते हैं कि मैं सर्वव्यापक हूँ , तू इसको मानता नहीं है, मैं गोलोक में रहता हूँ, वहां तुम आ नहीं सकते, मैं तुम्हारे अंतःकरण में तुम्हारे साथ बैठा हूँ इसका तुम्हे ज्ञान नहीं है , इसलिए लो, ' मैं ' अपने नाम में अपने आप को बैठा देता हूँ। " अपने नाम में 'मैं' मूर्तिमान बैठा हुआ हूँ।"
जिस दिन यह बात तुम्हारे मन में बैठ जाएगी , तुम्हें यह दृढ विश्वास हो जाएगा कि भगवान् और भगवान् का नाम एक है। दोनों में एक जैसी शक्तियाँ हैं, एक से गुण हैं, उस दिन फिर एक नाम भी जब लोगे, एक बार भी 'राधे' कहोगे तो कहा नहीं जायेगा, वाणी रुक जाएगी, मन डूब जायेगा, कंठ गद्गद हो जायेगा, फिर भगवत्प्राप्ति में क्या देर होगी। उसी क्षण गुरुकृपा एवं भगवत्प्राप्ति हो जाएगी। मेरे केवल इसी वचन पर विश्वास कर लो, स्वर्ण अक्षरों में लिख लो।
-----जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु जी।
My Beloved Lord! Make me so intoxicated with Your love that I may accept You as mine, without being concerned about whether or not You have accepted me.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...