Sunday, August 11, 2013

I AM ALWAYS THERE WITH YOU.

SHRI MAHARAJJI.
हरि-गुरु को सदा अपने साथ महसूस करो। यानि कभी अपने आप को अकेला मत समझो। जब कभी मक्कारी का विचार पैदा हो, तुरंत यह सोचो कि वे देख रहे हैं।
------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
O my mind! Please understand that they are also like you. Understanding this, please turn to Radha Krishn, your true Divine Beloved.”
-----JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.
गुरु का एक ही अर्थ है, जो तुम्हारी नींद तोड़ दे। और नींद का टूटना हमेशा दु:खद है। जो भी तुम्हारी नींद तोड़ेगा, उसपर तुम नाराज़ होओगे, क्योंकि वह तुम्हें बेचैनी में डाल रहा है। इसलिए गुरु शुरु में तो कष्टदायी मालूम पड़ता है, दु:खदायी मालूम पड़ता है, परंतु बाद में परम सुखदायी है।
कल फ़ुरसत न मिली तो क्या करोगे.....

इतनी मोहलत ही न मिली तो क्या करोगे......

रोज़ कहते हो कल से 'हरि-गुरु' सुमिरन प्रारंभ करेंगे........

कल सुबह आँख ही न खुली तो क्या करोगे???????????????
अगर तुम्हारी बुद्धि यह कहे कि ठीक नहीं है, तब भी आज्ञा तुम गुरु की ही मानना,तभी तो ये बुद्धि टूटेगी और गिरेगी।
.........श्री महाराजजी।
Life is as temporary as that of a bubble that appears in water one moment only to disappear the next. Prahlad says to his little friends, "Do not wait until you are older, to know God. Death may pay a visit any moment to any one of us."
.........SHRI MAHARAJJI.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...