Sunday, August 11, 2013

''भक्त बनना है तो सब में भगवान् को देखो ।''

"If you wish to become a true devotee, see Shri Krishna in each and every living being."

--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
परिपूर्ण तो कोई है नहीं,कमी सबमे है, लेकिन उस कमी को भी कोई सुनना नहीं चाहता।
------श्री कृपालु महाप्रभु।
"श्री महाराजजी बताते हैं कि: तीन चीज़ प्रमुख है- 'हरि', 'गुरु' और 'हरि-गुरु' की मिलन वाली पावर, 'भक्ति'। इन तीनों में 'अनन्य' रहो।"
"Desire is the most inauspicious thing if it is directed towards the world; it is the most auspicious asset if it is directed towards God."
"भगवान तुमकों नहीं भूलते। वो तुम्हारे हृदय में बैठे हैं, सदा सर्वत्र। वो तुम्हारा साथ नहीं छोड़ते कभी भी। तुम ही भूले हुए हो अपने वास्तविक संबंधी को। भगवान कहते हैं:- बस मेरा स्मरण करो, और कुछ न करो। मैं सबकुछ करूँगा तुम्हारा। तुम खाली स्मरण करो, बाकी सब काम में करूँगा, और सदा के लिए अपना बना लूँगा।

------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।"
सभी आध्यात्मिक शंकाओ का अकाट्य समाधान पाने के लिए जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज के अद्वितीय दिव्य प्रवचन निम्न चैनल पर अवश्य सुनिये। आप जब रेगुलर इन दिव्य प्रवचनों को सुनेंगे तो अवश्य महसूस करेंगे कि ऐसी दिव्य वाणी,ऐसा दिव्य ज्ञान आजतक आपको कहीं नहीं सुनने को मिला। इसलिए स्वर्णिम अवसर मानते हुए इन दिव्य प्रवचनों को श्रवण करके अपना मानव जीवन सफल बनायें। राधे-राधे।
"Attachment causes fear, by making us apprehensive of being separated from the person, object, situation, prestige, to which we are attached. The way to achieve fearlessness is to become detached. That is also the science of work : do your duty, but be detached from the results."

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...