This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Monday, August 19, 2013
श्यामसुंदर तुमसे मिलने को व्याकुल हैं......किन्तु तुम यह नहीं जानते थे।
अब यदि जान भी गए हो तो............................ ...मानना नहीं चाहते।
तुमने संसार में अकारण करुणा का व्यवहार कहीं नहीं देखा है........शायद इसीलिए अप्रतीती होती है।
यदि तुम यह मान लो की.........वे आज और अभी ही तुमसे मिलने को व्याकुल
हैं, तो बस तुम्हारे ह्रदय में भी उनके जैसी ही व्याकुलता उत्पन्न हो जाये
और बस ...वे मिल जायेंगे।
वो तुम्हारे झूठ मूठे रूप ध्यान , नाम , गुण आदि को भी तन्मयता से सुनते और देखते हैं...की शायद अब की बार ठीक से करेगा।
पर होता क्या है...? वो परखते ही रह जाते हैं.......और तुम उनके अहैतुकी स्नेह को न समझने के कारण ठीक ठीक नहीं कर पाते।
इसलिए तुम उपरोक्त बात को मान लो ...जिस समय तुम मेरी बात पर विश्वास कर लोगे...बस यही स्वर्ण मुहूर्त होगा तुम्हारा।
----- तुम्हारा कृपालु।
श्यामसुंदर तुमसे मिलने को व्याकुल हैं......किन्तु तुम यह नहीं जानते थे।
अब यदि जान भी गए हो तो............................ ...मानना नहीं चाहते।
तुमने संसार में अकारण करुणा का व्यवहार कहीं नहीं देखा है........शायद इसीलिए अप्रतीती होती है।
यदि तुम यह मान लो की.........वे आज और अभी ही तुमसे मिलने को व्याकुल हैं, तो बस तुम्हारे ह्रदय में भी उनके जैसी ही व्याकुलता उत्पन्न हो जाये और बस ...वे मिल जायेंगे।
वो तुम्हारे झूठ मूठे रूप ध्यान , नाम , गुण आदि को भी तन्मयता से सुनते और देखते हैं...की शायद अब की बार ठीक से करेगा।
पर होता क्या है...? वो परखते ही रह जाते हैं.......और तुम उनके अहैतुकी स्नेह को न समझने के कारण ठीक ठीक नहीं कर पाते।
इसलिए तुम उपरोक्त बात को मान लो ...जिस समय तुम मेरी बात पर विश्वास कर लोगे...बस यही स्वर्ण मुहूर्त होगा तुम्हारा।
----- तुम्हारा कृपालु।
अब यदि जान भी गए हो तो............................
तुमने संसार में अकारण करुणा का व्यवहार कहीं नहीं देखा है........शायद इसीलिए अप्रतीती होती है।
यदि तुम यह मान लो की.........वे आज और अभी ही तुमसे मिलने को व्याकुल हैं, तो बस तुम्हारे ह्रदय में भी उनके जैसी ही व्याकुलता उत्पन्न हो जाये और बस ...वे मिल जायेंगे।
वो तुम्हारे झूठ मूठे रूप ध्यान , नाम , गुण आदि को भी तन्मयता से सुनते और देखते हैं...की शायद अब की बार ठीक से करेगा।
पर होता क्या है...? वो परखते ही रह जाते हैं.......और तुम उनके अहैतुकी स्नेह को न समझने के कारण ठीक ठीक नहीं कर पाते।
इसलिए तुम उपरोक्त बात को मान लो ...जिस समय तुम मेरी बात पर विश्वास कर लोगे...बस यही स्वर्ण मुहूर्त होगा तुम्हारा।
----- तुम्हारा कृपालु।
अगर
आपको पुरा विश्वास है कि भगवान सब के ह्रदय में बैठा है और सर्वान्तर्यामी
है और उसको पता है आपको क्या चाहिये तो आप उनसे कुछ मांगोगे ही नहीं.
If you truely believe that God is with in heart of every soul and is
all knowing, and he knows what you need ,then you would not ask him for
anything.
.........JAGADGURU SHRI KRIAPLU JI MAHARAJ.
If you truely believe that God is with in heart of every soul and is all knowing, and he knows what you need ,then you would not ask him for anything.
.........JAGADGURU SHRI KRIAPLU JI MAHARAJ.
Receiving
a mantra from the Guru, massaging his feet, offering him worldly
objects or lavishing false praises on him does not constitute true
surrender.
केवल कान फूंका लेने मात्र से अथवा गुरूजी के पैर
दबाने मात्र से , अथवा गुरु जी को सांसारिक द्रव्य देने मात्र से ,अथवा
बातें बनाने मात्र से ,शरणागति नहीं हो सकती !!
------ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.
केवल कान फूंका लेने मात्र से अथवा गुरूजी के पैर दबाने मात्र से , अथवा गुरु जी को सांसारिक द्रव्य देने मात्र से ,अथवा बातें बनाने मात्र से ,शरणागति नहीं हो सकती !!
------ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.
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