Monday, August 19, 2013

राधे नाम रस ऐसा, गोविन्द राधे...
पिए जाओ पिए जाओ, अंत न बता दे...
So sweet is the nectar of Radha’s name that the more you drink it, the more thirsty you become for it.
~~~~~~Shri Maharaj Ji~~~~~~~~
The more a devotee invokes the feelings of servitude and humbleness, the more his love for God increases.
.......JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
किसी वास्तविक रसिक की शरण ग्रहण कर , उनका सतत सत्संग करते रहने से श्रद्धा , रति एवं भक्ति क्रमशः स्वयं प्राप्त हो जाती है।
.......श्री महाराज जी।
मानव देह की दुर्लभता के साथ साथ क्षणभंगुरता पर विचार करते हुए तुरंत वास्तविक महापुरुष द्वारा निर्दिष्ट साधना प्रारम्भ करो, संसारी कमाई पर नहीं, ईश्वरीय कमाई पर ध्यान दो। वो ही साथ जायेगी।
.......जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु जी।
साधक को अपनी शरणागति पर ध्यान देना चाहिए। वैसे आप लोगों को लगता है कि हम पूर्ण शरणागत हैं लेकिन वस्तुतः ऐसा है नहीं। छोटी सी भी बात आप से कही जाती है, आपका तुरंत उत्तर होता है नहीं हमने तो ऐसा नहीं किया अथवा ऐसा किया तो नहीं था न जाने कैसे हो गया? बाहर से आप मान भी लें लेकिन भीतर से अपनी गलती स्वीकार नहीं करते। गुरु आपके अन्दर की बात नोट करते हैं। वह परीक्षा भी लेता है। और साधक परीक्षा में फेल हो गया तब भी गुरु बारम्बार परीक्षा लेना बंद नहीं करता। जिस कक्षा का जीव है उसी कक्षा का परचा उसको दिया जाता है। अगर आप परीक्षा देने से घबराएंगे तो आप कभी भी भगवद प्राप्ति नहीं कर सकेंगे। इस प्रकार बार बार परीक्षा देते हुए हमें शरणागति को पूर्ण करना है।
............जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु जी।
आदेश पालन हो सदा गुरुधाम !
आदेश पालन ते मिलें श्याम श्यामा !!

भावार्थ --साधक को बड़ी सावधानी से सद्गुरु के आदेश का सदा पालन करना चाहिए !
गुरु आदेश -पालन से ही श्यामा श्याम की प्राप्ति होगी
.......जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु जी।
जब तक मन शुद्ध नहीं होता तब तक वेद - वाणी एवं गुरु वचनों पर विशवास नहीं होता।
.........श्री कृपालु जी महाराज।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...