Monday, August 19, 2013

Without theoretical knowledge of the scriptures, one cannot attain practical experience of God.
.........SHRI MAHARAJ JI.
जो पिय रुचि, मह रुचि राखे... प्रेम रस, सोई चाखे रे..............
अरे! कहाँ चले जा रहे हो? ये दिन रात तुमको भगवान की कृपा से इतना तत्वज्ञान कराया जाता है और तुम तुले हो सर्वनाश करने में।
-------श्री महाराजजी।
राधे नाम रस ऐसा, गोविन्द राधे...
पिए जाओ पिए जाओ, अंत न बता दे...
So sweet is the nectar of Radha’s name that the more you drink it, the more thirsty you become for it.
~~~~~~Shri Maharaj Ji~~~~~~~~
The more a devotee invokes the feelings of servitude and humbleness, the more his love for God increases.
.......JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
किसी वास्तविक रसिक की शरण ग्रहण कर , उनका सतत सत्संग करते रहने से श्रद्धा , रति एवं भक्ति क्रमशः स्वयं प्राप्त हो जाती है।
.......श्री महाराज जी।
मानव देह की दुर्लभता के साथ साथ क्षणभंगुरता पर विचार करते हुए तुरंत वास्तविक महापुरुष द्वारा निर्दिष्ट साधना प्रारम्भ करो, संसारी कमाई पर नहीं, ईश्वरीय कमाई पर ध्यान दो। वो ही साथ जायेगी।
.......जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु जी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...