Friday, September 6, 2013

साधक को किसी से द्वेष भाव नहीं रखना चाहिये ! यदि हो जाये तो बार - बार उसका चिंतन न करे ! यदि है भी तो कथन में उसके सामने प्रकट न करे ! संसार में सब स्वार्थी हैं अतः इस विषय को लेकर किसी से द्वेष होना गलत है !
.........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.
वास्तविक साधना गुरु आज्ञापालन ही है। जो कुछ प्राप्त होना है वह तो गुरु कृपा पर ही निर्भर है।

-----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

Sunday, September 1, 2013

बिना सद्गुरु की कृपा के इस संसार रूपी भवसागर से पार पाना मुश्किल ही नहीं, असम्भव है।
स्वयं से पूछो 'तुमने कितने घंटे साधना करने में लगाये? B.a ,M.a,M.ed करने में तो 10 गुणा समय दिया-पेट के लिए। ईश्वरीय काम के लिए कितने घंटे दिये?' और चाहते हो पूरा लाभ मिल जाये। कोई नगर तुम्हारे घर से 100 मील दूर है, तो दस मील चलने के बाद तुम खड़े क्यों हो गए? अरे और आगे चलो, नगर मिलेगा। रोड ठीक है, माइलस्टोन भी मिल रहें हैं। लेकिन अगर आपको रोड़ पर डाउट हो गया ,तो 10 मील जाकर लौट आए। फिर 10 मील दक्षि
...ण चले, फिर 10 मील उत्तर चले, फिर पश्चिम चले, इस प्रकार जीवन भर चलते जाओ, तो कभी भी लक्ष्य तक नहीं पहुचोंगे।
25 foot गड्ढा खोदा।निराश हो गया,"अजी यहाँ पानी नहीं है", और जगह खोदो। वहाँ भी 20 foot खोदा। यहाँ भी नहीं है। इस प्रकार करोड़ों foot खोदते जाओ। पानी नहीं निकलेगा। यदि लगातार एक जगह 50 foot और खोद डालते तो पानी निकल आया होता। अगर वास्तविक महापुरुष मिल जाये, तो कुछ भी असम्भव नहीं। अनन्त नगण्य जीव महापुरुष बने हैं। तुम क्यों नहीं बन सकते?

--------जगद्गुरु श्री कृपालुजी ।
DIVINE WORDS BY-SHRI MAHARAJ JI.

There are many types of devotion, but amongst them "nawadha bhakti" (nine types of devotion) are main. Among those nine, three can be further winnowed - shrawanam (listening), keertanam (chanting) and smaranam (remembering). Among these three, Shri Maharaj Ji puts focus on the remembrance of God, only.
WISHING ALL DEAR FRIENDS A VERY-VERY HAPPY JANMASHTMI.
RADHEY-RADHEY.
हे जीव ! समस्त शास्त्रों का ज्ञान त्याग के एक ही ज्ञान ह्रदय में धारण कर ले कि श्रीहरि का सुख ही तेरा सुख है !

>>>>>>>>जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु जी<<<<<<<<

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...