Friday, September 6, 2013

प्रेम सर्वत्र कोमल होता है, किन्तु उसमें एक दृढ़ पकड़ होती है। वह प्रियतम को छोड़कर नहीं रह सकता और न ही वह भक्ति के आनंद को अपने तक ही सीमित रखता है। वह अपने सर्वस्व , अपने प्रियतम प्रभु की सेवा बड़े प्रेम से करता है। उसका प्रत्येक कर्म सेवा ही होती है। उसी प्रकार अपनी समस्त इन्द्रियों को उनकी सेवा में लगा देना ही भक्ति है। अपनी सेवा, अपने समपर्ण से प्रभु को प्रसन्न करना ही भक्ति है।
--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
सूर्य के उदय होते ही प्रकाश पाकर वस्तुएँ दिखायी देने लगती हैं। इसी प्रकार संत साधक को दिव्य द्रष्टि प्रदान कर हरि का प्रत्यक्ष दर्शन करा देते हैं।
.......जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु जी।
मानवदेह देव दुर्लभ है। अत: अमूल्य है। इसी देह में साधना हो सकती है। अत: उधार नहीं करना है। तत्काल साधना में जुट जाना है। निराशा को पास नहीं फटकने देना है। मन को सद्गुरु एवं शास्त्रों के आदेशानुसार ही चलाना है। अभ्यास एवं वैराग्य ही एकमात्र उपाय है। सदा यही विश्वास बढ़ाना है कि वे अवश्य मिलेंगे। उनकी सेवा अवश्य मिलेंगी।
........जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज.
भगवान् और गुरु वैसे ही एक हैं जैसे पिता तथा माता का पति ! बोलने में अलग अलग शब्द हैं लेकिन अर्थ एक ही है !
--------जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु जी.
मायाबद्ध जीव का तो गोविन्द राधे !
तनु छुड्वाया जाय कष्ट हो बता दे !!

भावार्थ - मायाबद्ध जीव को शरीर छोड़ते समय असह पीड़ा होती है। सहस्त्रों बिच्छुओं के एक साथ काटने से जो पीड़ा होती है वही पीड़ा मायाधीन जीव को मृत्यु के समय होती है। मायाधीन जीव को शरीर छोड़ने को यमराज विवश करते हैं !
-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
हे राधा गोविन्द..........
यदि संतो का संग मुझे नरक में प्राप्त हो तो मुझे नरक ही दे देना परन्तु कुसंग से युक्त स्वर्ग सम्राट इन्द्र का पद भी मुझे मत देना !

--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
One should not forget God in times of happiness and should realise His grace even in times of misery.
सुख का अनुभव करते समय भी भगवान् को मत भूलो तथा दुःखकाल में भी उनकी कृपा का अनुभव करो।
.......JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...