This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Sunday, September 1, 2013
स्वयं
से पूछो 'तुमने कितने घंटे साधना करने में लगाये? B.a ,M.a,M.ed करने में
तो 10 गुणा समय दिया-पेट के लिए। ईश्वरीय काम के लिए कितने घंटे दिये?' और
चाहते हो पूरा लाभ मिल जाये। कोई नगर तुम्हारे घर से 100 मील दूर है, तो दस
मील चलने के बाद तुम खड़े क्यों हो गए? अरे और आगे चलो, नगर मिलेगा। रोड
ठीक है, माइलस्टोन भी मिल रहें हैं। लेकिन अगर आपको रोड़ पर डाउट हो गया ,तो
10 मील जाकर लौट आए। फिर 10 मील दक्षि
...ण चले, फिर 10 मील उत्तर चले, फिर पश्चिम चले, इस प्रकार जीवन भर चलते जाओ, तो कभी भी लक्ष्य तक नहीं पहुचोंगे।
25 foot गड्ढा खोदा।निराश हो गया,"अजी यहाँ पानी नहीं है", और जगह खोदो।
वहाँ भी 20 foot खोदा। यहाँ भी नहीं है। इस प्रकार करोड़ों foot खोदते जाओ।
पानी नहीं निकलेगा। यदि लगातार एक जगह 50 foot और खोद डालते तो पानी निकल
आया होता। अगर वास्तविक महापुरुष मिल जाये, तो कुछ भी असम्भव नहीं। अनन्त
नगण्य जीव महापुरुष बने हैं। तुम क्यों नहीं बन सकते?
--------जगद्गुरु श्री कृपालुजी ।
...ण चले, फिर 10 मील उत्तर चले, फिर पश्चिम चले, इस प्रकार जीवन भर चलते जाओ, तो कभी भी लक्ष्य तक नहीं पहुचोंगे।
25 foot गड्ढा खोदा।निराश हो गया,"अजी यहाँ पानी नहीं है", और जगह खोदो। वहाँ भी 20 foot खोदा। यहाँ भी नहीं है। इस प्रकार करोड़ों foot खोदते जाओ। पानी नहीं निकलेगा। यदि लगातार एक जगह 50 foot और खोद डालते तो पानी निकल आया होता। अगर वास्तविक महापुरुष मिल जाये, तो कुछ भी असम्भव नहीं। अनन्त नगण्य जीव महापुरुष बने हैं। तुम क्यों नहीं बन सकते?
--------जगद्गुरु श्री कृपालुजी ।
DIVINE WORDS BY-SHRI MAHARAJ JI.
There are many types of devotion, but amongst them "nawadha bhakti"
(nine types of devotion) are main. Among those nine, three can be
further winnowed - shrawanam (listening), keertanam (chanting) and
smaranam (remembering). Among these three, Shri Maharaj Ji puts focus on
the remembrance of God, only.
There are many types of devotion, but amongst them "nawadha bhakti" (nine types of devotion) are main. Among those nine, three can be further winnowed - shrawanam (listening), keertanam (chanting) and smaranam (remembering). Among these three, Shri Maharaj Ji puts focus on the remembrance of God, only.
Subscribe to:
Posts (Atom)
मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...
-
Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
-
गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
-
ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






