Wednesday, September 11, 2013

सच्चा साधक ------

1- द्वेष करने वाले व्यक्ति के प्रति भी द्वेष न करें ! उदासीन रहें !

2- आज कोई नास्तिक भी है , तो कल उच्च साधक बन सकता है ! अतः साधक यह न सोचे कि इसका पतन सदा के लिए हो चुका ! सूरदास आदि संत उदाहरण हैं !

3 - गुरु की सेवा करने वाला तो साधक ही है , उसके प्रिय होने के कारण उससे द्वेष करना पाप है !

4 - सचमुच भी कोई अपराधी हो तो भी मन से भी उसके भूतपूर्व अपराधों को न सोचें , न बोलें !

5 - संसार में भगवत्प्राप्ति के पूर्व सभी अपराधी हैं ! बड़े - बड़े साधकों का भी पतन एवं बड़े - बड़े पापियों का भी उत्थान एक क्षण में हो सकता है !

6 - सब में श्री कृष्ण का निवास है , अतः उनको ही महसूस करें !

**********जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ***********
कमर कस कर जिद कर लो कि मुझे अपने प्राणवल्लभ श्रीकृष्ण से मिलना ही है ! इसी जन्म में ही , नहीं - नहीं इसी वर्ष , नहीं - नहीं आज ही मिलना है ! यह व्याकुलता बढ़ाना ही वास्तविक साधना है ! इस प्रकार यह व्याकुलता इतनी बढ़ जाय कि अपने प्रियतम के बिना एक क्षण भी युग के सामान बीतने लगे , बस यही साधना की चरम सीमा है ! इसी सीमा पर भगवत्कृपा , गुरु कृपा द्वारा दिव्य प्रेम मिलेगा !

..............जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु .
There is no one in this world who attains worldly possessions and is not intoxicated.
..........SHRI MAHARAJJI.
"Meditation in raganuga bhakti is not a physical disciplinary act of concentration in the brain area. Meditation means feeling the Divine presence of Radha Krishn or your Spiritual Master near you."
Maya is not an illusion or false notion. It is a power of God.
.........SHRI MAHARAJJI.
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

हे! गणेश गणपति लंबोदर........ कृष्ण प्रेम पाऊँ दे दो यह वर...........अति कृपालु तुम गौरीनन्दन...... ,अस वर दो दें राधा दर्शन........जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा.......माता तो हैं पार्वती पिता महादेवा..........जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा........यह वर दे दो पाऊँ नित्य श्याम सेवा........जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा.........यह वर दे दो पाऊँ हरि-गुरु सेवा.........

...........श्री महाराजजी।
If your mind is remembering Radha-Krishn and Guru all the time then it cannot be affected by any kind of stress or turmoil in any situation. The fact that we experience stress is an indication that we have forgotten God and that is why Maya could adversely affect our mind and cause stress. We HAVE to remember to practice Roop Dhyan constantly while doing anything.
.........SHRI MAHARAJJI.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...