Wednesday, September 11, 2013

हे राधा गोविन्द..........
यदि संतो का संग मुझे नरक में प्राप्त हो तो मुझे नरक ही दे देना परन्तु कुसंग से युक्त स्वर्ग सम्राट इन्द्र का पद भी मुझे मत देना !

--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे ! ब्रह्मा को भी जीव खिलौना बना दे !!
सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे !पुरुषोतम को भी दास बना दे !!
सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे ! ब्रह्म को भी जीव सांटी डरा दे !!
सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे !बड़े ब्रह्म प्रेम को छोटा बना दे !!
सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे ! सब ते बड़े ब्रह्म को भी रुला दे !!
सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे ! ब्रह्म को भी जीव करताल पै नचा दे !!
सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे ! ब्रह्म पूर्णकाम को सकाम बना दे !!
सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे ! पूर्णब्रह्म को भी अपूर्ण बना दे !!
सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे ! ब्रह्म को भी छाछ भिखारी बना दे !!
सबते बड़ा है प्रेम गोविंद राधे !गोपियों के पाछे पाछे ब्रज में घुमा दे !!
{राधा गोविंद गीत }
........जगद्गुरू श्री कृपालु जी महाराज.
साधक को किसी से द्वेष भाव नहीं रखना चाहिये ! यदि हो जाये तो बार - बार उसका चिंतन न करे ! यदि है भी तो कथन में उसके सामने प्रकट न करे ! संसार में सब स्वार्थी हैं अतः इस विषय को लेकर किसी से द्वेष होना गलत है !
.........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.
भक्तिमार्गावलंबी को सर्वप्रथम उपर्युक्त 3 शर्तों को पूरा करना होगा ------
1 . त्रण से बढ़कर दीन भाव रहे।
2 . वृक्ष से बढ़कर सहिष्णु भाव रहे।
3 . सबको सम्मान दे , स्वयं सम्मान न चाहे।

.........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु.
To develop an intense desire for God-realisation, strengthen your decision that the world is not yours and cannot give you perfect happiness.

........SHRI MAHARAJ JI.
Shyama Shyam nam rupa leela guna dhama,
Gao roke rupadhyana yukta athon yama.

Sing the glories of Shyama Shyam’s (Radha Krishna’s) divine names, forms, qualities pastimes and abodes. Shed tears of longing for Them with your mind absorbed in Their loving remembrance.
-------SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
गुरु द्वारा ही श्री हरि के स्वरूप का सच्चा तत्व - ज्ञान प्राप्त होता है ! गुरु के अभाव में तो संसार में क , ख , ग , घ का ज्ञान भी असम्भव है !

........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...