Wednesday, March 26, 2014

The absolute essence of all the Divine philosophies is to attach yourself in loving remembrance of your soul beloved krishna with a growing desire to serve Him more and more.
............SHRI MAHARAJJI.
जैसे किसी वास्तविक महापुरुष का संग करने से अनंत जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। उसी प्रकार हरि गुरु से विमुख व्यक्ति का संग जीव से अनंत पाप करा देता है। इसीलिए हरि - गुरु से विमुख व्यक्तियों का संग नहीं करना चाहिये।
......जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु ।

You should continue to practice thinking that God is with you and He is very close to you.
यह अभ्यास करना चाहिए की श्याम सुन्दर मेरे साथ हैं, मेरे पास हैं|

------SHRI MAHARAJ JI.
मौत को हर समय याद रखो !पता नहीं अगला क्षण मिले न मिले ! कौन जनता है कल का दिन मिले न मिले ?

Always remember your impending time of death. No one knows if he will live to see the next moment or not. Who knows if he will live to see tomorrow?


.......SHRI MAHARAJ JI.

तुम अपने स्वार्थ पर विचार करो। परोपकार की बात ना सोचो। और विचार त्यागकर , श्रीकृष्ण से प्यार करो।
`````जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज`````

Tuesday, March 25, 2014

हमारी राधे दीनन की रखवार!
Hamaari radhe denan ki rakhawaar!

My Radha Rani is the saviour of the destitute.
.....SHRI MAHARAJ JI.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...