This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Thursday, April 3, 2014
जब
तक माया के अधीन हो तब तक क्यों सोचते हो कि मैं प्रशंसा के योग्य हूँ ।
जब तक तुम शरणागत नहीं हुए तब तक तुम्हे अहंकार किस बात का ? किसी भी जीव
का वास्तविक स्वरूप श्री कृष्ण दासत्व ही है । श्री कृष्ण के दास बन जाओ
फिर खूब अहंकार करो । हम छूट देते हैं ।लेकिन उस समय तुम अहंकार कर ही नहीं
सकते। भगवत्प्राप्ति से पहले रहता है अहंकार। अतः सदा सावधान रहो।
-------जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाप्रभु।
-------जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाप्रभु।
Wednesday, April 2, 2014
मैं सदा तुम्हारा हूँ..........!!!
मैं कहीं नहीं जा रहा हूँ। ऐसा कभी न सोचो। मैं सदा शरणागत के पास रहूँगा।
गुरु हमारे अत्यंत निकट हैं,दिन रात हमारे साथ रहते हैं । उनका वियोग कभी होता ही नहीं। नरक में भी वे हमारे साथ रहते हैं और बैकुंठ में भी वे हमारे साथ रहते हैं। वे हमारा साथ छोड़ देंगे ऐसा कभी नहीं समझना चाहिए। समझना ही नहीं --- अनुभव करना चाहिए।
हरि-गुरु को सदा साथ मानो इससे कामादि दोष जायेंगे। इष्टदेव एवं गुरु को सदा सर्वत्र अपने साथ निरीक्षक एवं संरक्षक के रूप में मानना है। कभी भी स्वयं को अकेले नहीं मानना है।
मैं कहीं नहीं जा रहा हूँ। ऐसा कभी न सोचो। मैं सदा शरणागत के पास रहूँगा।
गुरु हमारे अत्यंत निकट हैं,दिन रात हमारे साथ रहते हैं । उनका वियोग कभी होता ही नहीं। नरक में भी वे हमारे साथ रहते हैं और बैकुंठ में भी वे हमारे साथ रहते हैं। वे हमारा साथ छोड़ देंगे ऐसा कभी नहीं समझना चाहिए। समझना ही नहीं --- अनुभव करना चाहिए।
हरि-गुरु को सदा साथ मानो इससे कामादि दोष जायेंगे। इष्टदेव एवं गुरु को सदा सर्वत्र अपने साथ निरीक्षक एवं संरक्षक के रूप में मानना है। कभी भी स्वयं को अकेले नहीं मानना है।
भवदीय
जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
You
can never repay your Guru for what he has given you, because material
treasures cannot pay for spiritual goods, yet the scriptures state
emphatically that you must serve your Guru with body, mind and wealth.
Your Guru is not stingy with the spiritual gifts he showers upon you,
nor does He ever tire of giving you grace. Why do you think that you
have served Him enough?
Be greedy in serving the Guru. The best disciple is he who renders service without the Guru asking for it.
........JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHAPRABHU.
Be greedy in serving the Guru. The best disciple is he who renders service without the Guru asking for it.
........JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHAPRABHU.
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






