Friday, April 4, 2014

साधना का पहला शत्रु है अहंकार। तुम साथ क्या लेकर आये थे,जो तुम अहंकार करते हो। खाली हाथ आए थे,खाली हाथ ही जाओगे। जहाँ अहंकार आया समझो दीनता खत्म। दीनता खत्म तो समझो कि साधना चौपट हो गयी।
........श्री महाराजजी।

जो समझा दे श्रुति सार, उर भरा प्रेम रिझवार।
सोई है सद्गुरु सरकार, गुरु सोइ 'कृपालु' सरकार।।

स्वार्थ माने आनंद की भूख। हम आनंद रुपी भगवान् के अंश है, इसलिये नैचुरल (natural) आनंद चाहते हैं। ये कोई बुराई नहीं है।
........श्री महाराज जी।

अरे कृत्घन मन! प्रभु ने तुझे प्रेम मार्ग का पथिक बनाया है, फिर तुझ में घृणा, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष जैसी मलिन वृत्तियों का वास क्यों? क्या यह अनवरत नामापराध की क्षृंखला तुझे अकारण-करुण, कृपासिन्धु, दीनबंधु स्वामी, सखा, सुत, पति रूप महाप्रभु के श्री चरणों से प्रथक न कर देगी। फिर तू कहाँ जायेगा? हे मन! तेरे जैसे पतित के लिए यदि कोई दूसरा स्थान नहीं ,तो अब बहुत हो गया, छोड़ दे अपनी जन्म-जन्म की आदत और अपने एकमात्र प्यारे श्री महाराजजी के चरणों का प्रेम-पुजारी बनकर उनकी कोटी-कोटी कृपाओं का चिंतन करते हुए एकाग्र,अनन्य व निष्काम भाव से उनकी सेवा में लग जा।

साधुसंग मानों चावल का धोया हुआ पानी होता है। किसी को अत्यधिक नशा हो तो उसे चावल का धोया हुआ पानी पिला देने से नशा उतर जाता है। इसी प्रकार साधुसंग संसार में कामना , वासनारूपी मद पीकर जो मत हुए हैं उनका नशा उतार देता है।
.....जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

Thursday, April 3, 2014

Shri Maharaj Ji reminds us:
Who knows when Yamraj will come! We must be in a hurry to loot the treasure of Divine Love and keep the mind engaged in the Godly subject so that the mind may think of God in the last minute also.

हे श्यामसुन्दर......!!!
संसार में भटकते - भटकते थक गया। हे करुणा वरुणालय ! तुमने अकारण करुणा के परिणामस्वरूप मानव देह दिया , गुरु के द्वारा तत्वज्ञान कराया कि किसी तरह तुम्हारे सम्मुख हो जाऊँ तथा अनन्त दिव्यानन्द प्राप्त करके सदा-सदा के लिए मेरी दुःख निवृति हो जाए लेकिन यह मन इतना हठी है कि तुम्हरे शरणागत नहीं होता।

--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...