Saturday, April 5, 2014

भगवद विषय में मन लगाये रहो,ताकि मृत्युकाल में भी भगवान का स्मरण रहे।
........श्री महाराज जी।

भगवान तुमकों नहीं भूलते। वो तुम्हारे हृदय में बैठे हैं, सदा सर्वत्र।
वो तुम्हारा साथ नहीं छोड़ते कभी भी। तुम ही भूले हुए हो अपने वास्तविक संबंधी को। भगवान कहते हैं:- बस मेरा स्मरण करो, और कुछ न करो। मैं सबकुछ करूँगा तुम्हारा। तुम खाली स्मरण करो, बाकी सब काम में करूँगा, और सदा के लिए अपना बना लूँगा।

------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।

हे श्यामसुन्दर !
तुम अनादिकाल से मेरे थे, और अनंतकाल तक मेरे बने रहोगे, यह वेदों में तुम्हीं ने स्वयं कहा है। फिर अधम उधारन श्री कृष्ण। मुझे क्यों भुला दिया ?

------श्री महाराज जी।

भगवान का नाम,रूप,लीला,गुण,धाम एवं उनके भक्त सब एक ही हैं,इनमे कहीं भी मन का अनुराग अनन्यता ही है।
.......श्री महाराजजी।

प्रेम सर्वत्र कोमल होता है, किन्तु उसमें एक दृढ़ पकड़ होती है। वह प्रियतम को छोड़कर नहीं रह सकता और न ही वह भक्ति के आनंद को अपने तक ही सीमित रखता है। वह अपने सर्वस्व , अपने प्रियतम प्रभु की सेवा बड़े प्रेम से करता है। उसका प्रत्येक कर्म सेवा ही होती है। उसी प्रकार अपनी समस्त इन्द्रियों को उनकी सेवा में लगा देना ही भक्ति है। अपनी सेवा, अपने समपर्ण से प्रभु को प्रसन्न करना ही भक्ति है।
--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
Scientists estimate with their telescopes that Milky Way, which is one of the 1 billion galaxies in the universe, has 100 billion suns. Modern science thus estimates there are 10 to the power 20 suns in our universe. Vedas tell us ours is only one of the infinite universes. How tiny we are in this amazingly vast creation! And how unspeakably great is the Creator of the world!
........SHRI MAHARAJJI.

The entire world..relatives, friends, bank balance, power, respect, etc...is as temporary and illusionary as a dream..The only thing, that will go with us after death, is our devotion to God.
..........SHRI MAHARAJJI.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...