Wednesday, April 9, 2014

आलस्य न करो, सिद्धान्त को सदा साथ रखो।
...श्री महाराज जी।

हम किसी जीव को छोड़ देंगे , यह कैसे सम्भव है।
यह तो उस व्यक्ति विशेष की स्थिति पर निर्भर करता है।
जब तक अलग रहेगा तभी तक अगल रहेगा।
लेकिन जैसे ही अन्दर से वह ठीक हो जायेगा , 'कृपालु' को तुरन्त ही ठीक हो जाना पड़ेगा , चाहे उससे पूर्व उसने अनन्त अपराध किये हैं।

………जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।

श्री महाराज जी द्वारा --------
हम दस - पन्द्रह सालों से गुरु के साथ में रह रहे हैं और बड़े अहंकार से कहते हैं कि मेरे को पन्द्रह साल हो गये सत्संग में चलते हुये ! लेकिन ये नहीं सोचते कि पाने वाले एक हफ्ते में पा लेते हैं , लेकिन हम लोग पन्द्रह साल तक भी कुछ नहीं पा सके ! हमारे कीर्तन में भी आँसू नहीं आते , इतने साल से गुरु का संग मिल रहा है, फिर भी दीनता नहीं आई , गुरु ने इतना अपनापन दिया , फिर भी प्यार हमारा उनसे न हो सका ! बार - बार अपने अन्दर की गलतियों को रियलाइज करके आँसू बहाओ।

WHEN A SOUL DESPERATELY CRIES FOR 'RADHARANI', SHE RUNS TO HIM WITHOUT EVEN CARING FOR HERSELF.WHEN A SOUL LOVINGLY CALLS 'RADHEY! 'RADHEY!' RADHARANI ALSO SHEDS TEARS OF LOVE FOR HIM.THE DEVOTEE FURTHER SAYS,"WHEN RADHA RANI HERSELF IS MY DIVINE GUARDIAN,WHY SHOULD I BE AFRAID OF ANYTHING IN THE WORLD."
-----JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.

मौत को हर समय याद रखो !पता नहीं अगला क्षण मिले न मिले ! कौन जनता है कल का दिन मिले न मिले ?

Always remember your impending time of death. No one knows if he will live to see the next moment or not. Who knows if he will live to see tomorrow?


.......SHRI MAHARAJ JI.

तुम अपने स्वार्थ पर विचार करो। परोपकार की बात ना सोचो। और विचार त्यागकर , श्रीकृष्ण से प्यार करो।
`````जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज`````

वे हमें अपना बनावें चाहे न बनावें इसकी हमें चिन्ता नहीं !
हम उन्हें अपना बनाए रहेंगे बस यही निश्चय रहे !

------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...