This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Monday, April 14, 2014
Krishna
means ‘One who attracts.’ Through His beauty, grace, sweetness,
merciful nature and loving ways, the sweet Lord has the power to attract
even the darkest heart and lighten even the heaviest of minds. He
showers Divine Love on all, without giving any thought to whether or not
the recipient is worthy of the gift.
........JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
........JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
संसार
सम्बन्धी तन-मन-धन कम से कम 'उपयोग' करो, 'उपभोग' नहीं | जितने में काम चल
जाये बस उतना, उससे अधिक नहीं । जितने में पेट भर जाये- दो रोटी, चार रोटी
से, बस तुम उतने के हकदार हो हमारी सृष्टि से । भगवान कह रहे हैं | इससे
अधिक इकट्ठा किया,कब्जा किया तो मरो, फिर हम बतायेंगे कि क्या होगा
तुम्हारा । 'सस्तेनो दण्डमहरति' उसको दण्ड मिलेगा मरने के बाद और सामान भी
यहीं रखा जायेगा । तो उसने कमा करके बेटे को दे दिया पचास करोड़, अब बेटा
आवारा होगा, और बाप को भी नरक मिलेगा। तुमने परमार्थ कितना किया ? अपने
शरीर पर कितना खर्च किया, बाल बच्चों पर कितना किया परमार्थ में कितना किया
? हिसाब बताओ ।
------जगद्गुरू श्री कृपालु जी महाराज।
------जगद्गुरू श्री कृपालु जी महाराज।
अब
देखो यहाँ चार-पाँच सौ आदमी आये हैं । अब अगर एक आदमी सोचे- हमसे तो बात
ही नहीं किया । भई कोई संसारी व्यवहार हो कि चलो एक-एक आदमी को नम्बर-वार
बुलाओ और एक-एक आदमी से बात करो, ऐसा तो नहीं । और जिससे बात करेंगे उससे
अधिक प्यार है,ये सोचना गलत है । मेरी गोद में कोई बैठा रहे 24 घण्टे इससे
कुछ नहीं होगा । उसका मन जितनी देर मेरे पास रहेगा बस उसको हम नोट करते हैं
। खुले आम सही बात करते हैं । बदनाम हैं सारे विश्व में हम स्पष्ट
व्यक्तित्व में साफ-साफ । आप ये ना सोचें कि हम बहिरंग अधिक
सम्पर्क पा करके और बड़े भाग्यशाली हो गए। और एक को बहिरंग सम्पर्क न मिला,
उससे बात तक नहीं किया मैंने तो उसका कोई मूल्य नहीं है हमारे हृदय में ।
ये सब कुछ नहीं । कुछ लोगों की आदत होती है बहुत बोलने की । वो जैसे ही
लैक्चर से उतरेंगे सीधे हमारे पास आएंगे और बकर-बकर बोलते जाएंगे । कुछ लोग
अपना हृदय में ही भाव रखते हैं, दूर से ही अपना आगे बढ़ते जाते हैं । मैं
तो केवल हृदय को देखता हूँ । मुझे इन बहिरंग बातों से कोई मतलब नहीं है ।
और कभी बहिरंग बातों के धोखे में आना भी मत । इतना कानून याद रखना- “ये यथा
मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम” । जितनी मात्रा में हमारा सरेण्डर
होगा, हमारी शरणागति होगी उतनी मात्रा में ही उधर से फल मिलेगा ।
----------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
We
cannot buy back even one minute of lost time, even if we possess all
world’s wealth. Therefore, time should not be squandered in unnecessary
sense gratification. We should instead fully dedicate our every thought,
word, and deed in all times, places, and circumstances to awakening our
dormant devotion to HARI-GURU. This is the proper utilization of the
human form of life.
--------Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj.
--------Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj.
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