Thursday, April 17, 2014

हे श्यामसुन्दर !
तुम अनादिकाल से मेरे थे, और अनंतकाल तक मेरे बने रहोगे, यह वेदों में तुम्हीं ने स्वयं कहा है। फिर अधम उधारन श्री कृष्ण। मुझे क्यों भुला दिया ?

---श्री महाराज जी।

It is God's promise that He will accept and love the individual soul in the same manner that the individual soul loves Him.
..........SHRI MAHARAJJI.

सबसे बड़ा पापी वो होता है जो भगवननाम लेने से डरता है......रुचि नहीं दिखाता,अपने को इतना बड़ा मानते हैं ये मूर्ख लोग कि भगवान का नाम लेंगे तो इन्सल्ट(insult) हो जायेगी। भगवान से भी बड़ा समझे बैठे हैं लोग खुद को,और जरा सा संसारी संकट आ जाये फिर देखो इन अहंकारियों को,कैसे चूहों कि तरह मंदिरो में भागते हैं......कैसे पंडितों के चक्कर काटते हैं,कैसे हाथ दिखाते फिरते हैं.....ये सबसे बड़े पापी का प्रमाण है जिसको संसार प्रिय लग रहा है,भगवान नहीं । कितने बड़े आश्चर्य की बात है किस चीज का अहंकार है इन लोगो को जो भगवान का नाम नहीं ले रहे हैं.......अरे! कोई भी तो गुण नहीं है,कोई भी तो योग्यता नहीं है इनमे, जिसका अहंकार हो इनमे,बात क्या है,किस बात का अहंकार है...संसारी बाते सुनने में, गंदी गंदी बातें सुनने में, करने में, बड़ा रस मिलता है.......और भगवान के नाम लेने में position खराब हो जाती है इनकी.......ऐसे पापी लोग मानव देह पाकर भी उसको जबरदस्ती नष्ट करने पर तुले हुए हैं।

भगवान का नाम,रूप,लीला,गुण,धाम एवं उनके भक्त सब एक ही हैं,इनमे कहीं भी मन का अनुराग अनन्यता ही है।
.......श्री महाराजजी।

जितना-जितना संसार को अपना समझते रहोगे,उतना-उतना भगवान पराया बनता जायेगा।
-------श्री महाराजजी।

Wednesday, April 16, 2014

विचार कीजिये!
आज धन है, कल नहीं है, आज बल है, कल बुढ़ापा आ गया, आज रूप है कल कुरूप हो गये, जो कुछ है सीमित है वह भी एक सा नहीं रहेगा। और फिर एक दिन सारा का सारा जीरो(zero) हो जायेगा और लोग कहेंगे- आज वह चला गया।
------'श्री कृपालु गुरुदेव ' के श्रीमुख से।

गुरु का एक ही अर्थ है, जो तुम्हारी नींद तोड़ दे। और नींद का टूटना हमेशा दु:खद है। जो भी तुम्हारी नींद तोड़ेगा, उसपर तुम नाराज़ होओगे, क्योंकि वह तुम्हें बेचैनी में डाल रहा है। इसलिए गुरु शुरु में तो कष्टदायी मालूम पड़ता है, दु:खदायी मालूम पड़ता है, परंतु बाद में परम सुखदायी है।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...