Saturday, April 19, 2014

Devotion must be practiced under the guidance of a GURU. Guru must possess THEORETICAL KNOWLEDGE OF SCRIPTURES and PRACTICAL EXPERIENCE OF GOD. One must look for the following in a Guru:
He must clearly answer the questions you have about God and the path leading to God.
He must remove all the doubts you have regarding God.
The Sadhana prescribed by him must bring about internal changes.
Guru is Divinity in human form. One must trust the Guru to lead him to God.

बिना हरि के भक्ति सम्भव है किन्तु बिना गुरु कृपा के भक्ति तत्व को नहीं जाना जा सकता है। अतएव भक्ति में गुरु तत्व ही प्रधान है।
-----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

जो मेरी ही शरण में आ जाता है उसके अनन्त जन्म के पाप को नाश कर देता हूँ ! तो फिर पाप पाप की बात क्यों खोपड़ी में लगी है तेरे ? मैं पूर्ण शरणागत के थोड़े से पापों को नहीं , 'सर्वपापेभ्यो ' समस्त पापों को नष्ट कर देता हूँ और आगे पाप न करेगा ये ठेका ले लेता हूँ ! गारण्टी ! लेकिन प्रपन्न होना होगा ! प्रपन्न माने पूर्ण शरणागति यानी मन बुद्धि भी शरणागत हो ! अपनी बुद्धि न लगा ! मन भी मुझे दे दे !
.........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।

All the knowledge in the world, right from the worldly to the Vedic, attempt to answer these two questions, "What do we want and how do we attain it?" How surprising it is that in countless lives, we have not been able to answer them.
.......SHRI KRIPALU MAHAPRABHU JI.

अपने पूरे हृदय के साथ अपने को भगवान् के हाथों में समर्पित कर दो, तुरंत के पैदा हुए बच्चे जैसे बन जाओ, यही आत्म समर्पण है।
Put yourself with all your heart and strength into the hands of God.This is Self Surrender.

-------JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.

मन को बाँधों। मन के दास न बनो। कुसंग से सदा बचो तथा मन को सदा अपने गुरु में ही लगाये रहो।
मन के हारे हार है , मन के जीते जीत।

~~~~ श्री महाराज जी।

शास्त्र गुरु वचनों में गोविंद राधे।
पूर्ण विश्वास ही है श्रद्धा बता दे।।
शास्त्र-वेद और गुरु के वचन पर पूर्ण विश्वास- इसका नाम श्रद्धा है। श्रद्धा माने- दृढ़ विश्वास।
जैसे physical विषय में मरीज़ कुछ नहीं जानता,वह डॉ. पर सेंट-परसेंट विश्वास,श्रद्धा करता है, ऐसे ही spiritual side में हम कुछ नहीं जानते इसलिए spiritual man रूपी doctor की बात सेंट-परसेंट मानना ही होगा। ये श्रद्धा है।

-------श्री कृपालु जी महाप्रभु।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...