Monday, April 21, 2014

You can never repay your Guru for what he has given you, because material treasures cannot pay for spiritual goods, yet the scriptures state emphatically that you must serve your Guru with body, mind and wealth. Your Guru is not stingy with the spiritual gifts he showers upon you, nor does He ever tire of giving you grace. Why do you think that you have served Him enough?
Be greedy in serving the Guru. The best disciple is he who renders service without the Guru asking for it.
........JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHAPRABHU.

मन कि निर्मलता कि कसौटी है – भगवत विषय में मन का लगाव. यह कसौटी श्रेष्ठ हैं . इश्वरीय तत्व को पाने के लिये हमारे मन मे कितनी छ्टपटाहट है, यहि मन की निर्मलता कि सबसे बडी कसौटी है।
........ श्री महाराज जी।

माया का लड़का 'मन'; तुम भगवान के लड़के 'जीव' और ये जड़ माया का लड़का तुमको नचा रहा है और तुम अपने आपको बुद्धिमान कहते हो।
-----जगद्गुरू श्री कृपालु जी महाराज।
It is only through the Grace of God that one can be eternally free from all mental afflictions.
.....SHRI MAHARAJJI.

सबसे बड़ा उपकार यही है कि कोई जीव किसी अन्य जीव को भगवान की तरफ,गुरु की तरफ मोड़ दे,अर्थात उसे अपने गुरु की बाते बताये।उनसे मिलाये।
.......श्री महाराज जी।

Sunday, April 20, 2014

जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज के श्रीमुख से नि:सृत अमृत वचन.....................
श्री महाराजजी बताते हैं की "श्यामा-श्याम" के लिए एक आँसू बहाने से वे हजार आँसू बहाते हैं। काश! की मेरी इस वाणी पर आप विश्वास कर लेते तो आँसू बहाते न थकते। अरे उसमें हमारा खर्च क्या होता है। उसमें क्या कुछ अकल लगाना है। क्या उसके लिए कोई साधना करनी है? क्या इसमें कोई मेहनत है। क्या यह कोई जप है? तप है? आँसू उनको इतने प्रिय हैं और तुम्हारे पास फ्री हैं। क्यों नहीं फ़िर उनके लिए बहाते हो? निर्भय होकर उनसे कहो कि तुम हमारे होकर भी हमें अबतक क्यों नहीं मिले। तुम बड़े कृपण हो, बड़े निष्ठुर हो, तुमको जरा भी दया नहीं आती क्या? हमारे होकर भी हमें नहीं मिलते हो। इस अधिकार से आँसू बहाओ। हम पतित हैं, अपराधी हैं, तो क्या हुआ। तुम तो 'पतित पावन' हो। फ़िर अभी तक क्यों नहीं मिले? अगर इतने बड़े अधिकार से मन से प्रार्थना करोगे, आँसू बहाओगे, तो वो तुम्हारे एक आँसू पर स्वयं हजार आँसू बहाते हैं।

Meeting a Nitya Siddha Rasik Saint in Human Birth, tasting the nectar of Divine Name, learning Hari-Guru Bhakti and getting Guru Seva...This is the best human life I would have ever imagined and Kripalu's causeless mercy has exceeded the limit..............!!!!!
RADHEY-RADHEY.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...