Sunday, May 4, 2014

एक साधक का प्रश्न --- किसी साधक का ये सोचना कि श्री महाराज जी दुःखी हैं , क्या इस प्रकार का चिंतन गलत है ?
श्री महाराज जी द्वारा उत्तर ---- गलत तो नहीं है। सब कुछ ठीक है। किन्तु क्यों दुःखी है , उसका कारण सोचे, भविष्य में उसको दूर करने का प्रयत्न करे।
यदि वह ऐसा नहीं करता है तो वह सोचेगा --- हम तो महाराज जी को सुखी कर ही नहीं सकते और यह नामापराध कर डालेगा।

Krishna means ‘One who attracts.’ Through His beauty, grace, sweetness, merciful nature and loving ways, the sweet Lord has the power to attract even the darkest heart and lighten even the heaviest of minds. He showers Divine Love on all, without giving any thought to whether or not the recipient is worthy of the gift.
........JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.

'' अनादिकाल से हम संसार की जेल में दण्ड भोग रहे हैं ! इसका एक कारण है कि हमने भगवान् के साथ ' ही ' नहीं लगाया , केवल ' भी ' लगाया ! एक शब्द में इतना बड़ा दण्ड ! भगवान् भागवत में कहते हैं " मैं सब कुछ हूँ तेरा जीव ! क्यों भूल गया तू मुझे ? '' ये माया जो तेरे ऊपर अधिकार किये है केवल मुझे भूलने के कारण ! लेकिन मैं नहीं भूला तुझे ! मैं तेरे हृदय में बैठ कर तेरे एक एक आइडियाज ( IDEAS ) को नोट करता हूँ , चुपचाप , तुझे
डिस्टर्ब ( DISTURB ) नहीं करता ! इसलिये जीव ! तू निरंतर मेरा स्मरण करते हुये मेरे नाम के साथ ' ही ' लगा ' भी ' नहीं। जिस दिन तू ' ही ' लगा देगा उस दिन भगवत प्राप्ति तेरे लिये करतलगत है।''

........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

Saturday, May 3, 2014

The intermediary between the soul and the Supreme Soul or God, is the great soul or Saint. He is one who knows God, has seen Him and is united with Him. In other words, the soul who has attained God is called a Saint.
------SHRI MAHARAJ JI.

विपरीत चिन्तन हो, तुरन्त लाईन काट दो, - “नहीं मैं ही गलत हूँ, वो सही है, उनसे गलत काम हो ही नहीं सकता |” जैसे खाना खाते समय यदि एक चीज भी गलत आई, थोड़ी सी प्रतिकूल चीज आई, मुख से बाहर निकाल दिया | ऐसे ही आत्मा के प्रतिकूल पदार्थ यानी प्रतिकूल चिन्तन प्रारम्भ होते ही इलाज करो, अन्यथा द्रौपदी के चीर की भाँति बढ़ता ही जायेगा, फिर सँभल नहीं पायेगा | भगवान कहते हैं, “समस्त शास्त्रों का समस्त ज्ञान समस्त जीव प्राप्त नहीं कर सकते हैं |” यदि वह केवल इतना ही याद रखें कि विरक्त होकर वास्तविक गुरु के शरणागत हों और प्रतिक्षण गुरु के अनुकूल ही चिन्तन व संकल्प करें तो उनका काम बन जायेगा |
-----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

मांगो वर एक मना, दे दो हरि प्रेम धना।
Maango var ek manaa, de do Hari prem dhanaa.............
The only boon worth praying for is to ask Shri Krishna for His Divine Love.
........SHRI MAHARAJJI.

Friday, May 2, 2014

The supreme power of all of God’s powers is called para shakti, which is also called antaranga shakti, svarupa shakti and yogamaya shakti. It is God’s most intimate and personal power. This is the svamini or supreme governor of all the other powers of God. It is due to this power that God remains ever blissful.
.........SHRI MAHARAJ JI.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...