Saturday, May 17, 2014

हे प्रभु ! मैं तो सदा से ही माया से भ्रमित होकर आपसे विमुख होकर संसार में भटकता रहा। गुरु कृपा से मेरी मोह निद्रा टूटी। उनके इस उपकार के बदले में मैं कंगाल भला कौन सी वस्तु उन्हें अर्पित कर सकता हूँ। क्योंकि गुरु के द्वारा दिये गये ज्ञान के उस शब्द के बदले सम्पूर्ण विश्व की सम्पति भी उन्हें सौंप दी जाय तो भी ज्ञान का मूल्य नहीं चुकाया जा सकता। ज्ञान दिव्य है और सांसारिक पदार्थ मायिक हैं।
!! जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु !!

Supreme God and the souls are chetan, live. In gist, this means they have senses, mind, intellect, physical form and they perform actions. The soul is not independent. It is a power of God, and as such, it is called a part or ansh of God.
--------JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.

भगवान् और संत ये दो पर्सनेलिटी ऐसी हैं जो शरीर से अलग हुए तो दिखायी पड़ते हैं | एक्टिंग में किसी को छोड़कर जीवनभर को वियोगी बना सकते हैं लेकिन अन्दर से कभी भी अलग नहीं हो सकते | हमारा शरीर नहीं रहता, तब भी वे रहते हैं | नरक में भी वो हमारे साथ रहते हैं और बैकुण्ठ में भी वे हमारे साथ रहते हैं | वे हमारा साथ छोड़ देंगे ऐसा कभी समझना ही नहीं चाहिए | समझना ही नहीं - अनुभव करना चाहिए |
----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.

As long as the individual soul is under the control of Maya, all faults like lust, anger, greed, etc., will remain with him.
जब तक माया का अधिकार रहेगा तब तक काम क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार आदि सब दोष रहेंगे।
-----SHRI MAHARAJ JI.

Friday, May 16, 2014

ऐसे ही समय बीतता जा रहा है अब 30 साल के हो गये, अब 50 साल के हो गये, हाँ बीता जा रहा है, आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं, एक दिन फट यमराज का ऑर्डर (order) हो जायेगा।
.......श्री महाराजजी।

"श्री महाराजजी बताते हैं कि: तीन चीज़ प्रमुख है- 'हरि', 'गुरु' और 'हरि-गुरु' की मिलन वाली पावर, 'भक्ति'। इन तीनों में 'अनन्य' रहो।"

कुछ साधक श्री कृष्ण के भक्त होते हैं एवं कुछ साधक राधारानी के ही भक्त होते हैं। साथ ही दोनों में भेदभाव रखते हैं। यह नामापराध है। वस्तुतः राधाकृष्ण एक ही तत्व है। पूर्व संस्कार के अनुसार किसी में अधिक अनुराग हो सकता है किन्तु यह ध्यान रखना चाहिये कि दोनों सदा एक हैं।
.........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।


मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...