The
material mind oscillates amidst the three gunas, and so at times we
experience a deep longing for God and at times we feel uninspired.
However, a sadhak is one who pushes the mind and intellect to harbor a
deep desire for God, even when they would rather be languid and cold.
Sometimes we naturally feel inspired. Other times, when we strain to
become inspired, even when we don't naturally feel so, that is sadhana.
This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Monday, May 19, 2014
Saturday, May 17, 2014
भक्त बनना है तो सबमें भगवान् को देखो किसी का अपमान न करो। कड़क न बोलो। उसको दुःखी न करो -
परपीड़ा सम नहिं अधमायी ।
सबसे बड़ा पाप कहा गया है दुसरे को दुःखी करना । कम बोलो , मीठा बोलो और सहनशीलता बढ़ाओ , नम्रता बढ़ाओ , दीनता बढ़ा। इससे साधना जो किया है या जो कर रहे हो वो पूँजी बनी रहेगी। ये काम , क्रोध , लोभ , मोह आकर उसको बिगाड़ देते हैं। तो साधक फिर वहीँ लौटकर आ जाता है , जहाँ से चला था। प्लस नहीं हो पता। तो कमाए चाहे १० हजार लेकिन खर्चा कम कम से कम करे तो पूँजी बढ़ती जाती है , और १० हजार कमाया १५ हजार खर्चा करे वह कमाई किस काम की। तो सत्संग करना भगवान् की भक्ति करना , ये तो कमाई है गधा भी जनता है लेकिन इस कमाई में गड़बड़ न होने पावे , ये सावधानी बरतना चाहिए।
परपीड़ा सम नहिं अधमायी ।
सबसे बड़ा पाप कहा गया है दुसरे को दुःखी करना । कम बोलो , मीठा बोलो और सहनशीलता बढ़ाओ , नम्रता बढ़ाओ , दीनता बढ़ा। इससे साधना जो किया है या जो कर रहे हो वो पूँजी बनी रहेगी। ये काम , क्रोध , लोभ , मोह आकर उसको बिगाड़ देते हैं। तो साधक फिर वहीँ लौटकर आ जाता है , जहाँ से चला था। प्लस नहीं हो पता। तो कमाए चाहे १० हजार लेकिन खर्चा कम कम से कम करे तो पूँजी बढ़ती जाती है , और १० हजार कमाया १५ हजार खर्चा करे वह कमाई किस काम की। तो सत्संग करना भगवान् की भक्ति करना , ये तो कमाई है गधा भी जनता है लेकिन इस कमाई में गड़बड़ न होने पावे , ये सावधानी बरतना चाहिए।
.........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
हे
प्रभु ! मैं तो सदा से ही माया से भ्रमित होकर आपसे विमुख होकर संसार में
भटकता रहा। गुरु कृपा से मेरी मोह निद्रा टूटी। उनके इस उपकार के बदले में
मैं कंगाल भला कौन सी वस्तु उन्हें अर्पित कर सकता हूँ। क्योंकि गुरु के
द्वारा दिये गये ज्ञान के उस शब्द के बदले सम्पूर्ण विश्व की सम्पति भी
उन्हें सौंप दी जाय तो भी ज्ञान का मूल्य नहीं चुकाया जा सकता। ज्ञान दिव्य
है और सांसारिक पदार्थ मायिक हैं।
!! जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु !!
!! जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु !!
भगवान्
और संत ये दो पर्सनेलिटी ऐसी हैं जो शरीर से अलग हुए तो दिखायी पड़ते हैं |
एक्टिंग में किसी को छोड़कर जीवनभर को वियोगी बना सकते हैं लेकिन अन्दर से
कभी भी अलग नहीं हो सकते | हमारा शरीर नहीं रहता, तब भी वे रहते हैं | नरक
में भी वो हमारे साथ रहते हैं और बैकुण्ठ में भी वे हमारे साथ रहते हैं |
वे हमारा साथ छोड़ देंगे ऐसा कभी समझना ही नहीं चाहिए | समझना ही नहीं -
अनुभव करना चाहिए |
----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.
----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.
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Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






