Sunday, May 25, 2014

Shri Maharaj Ji says:
It is not impossible to attain God. One has to have firm determination. Penny by penny a man becomes a millionaire. Bit by bit, a man acquires great knowledge. If he is determined, a human can attain God by utilizing each and every moment wisely. Why are you bent on wasting this precious human life?

Saturday, May 24, 2014

मैं तुम्हारा हूँ ............
मैं तुम्हारा हूँ फिर निराशा कैसी ?
उनको पतित प्यारे हैं फिर चिंता क्या ?
निराशा साधना में सबसे बड़ी बाधा है। हरि गुरु चिंतन निरंतर चलता रहे , तो कभी निराशा आ ही नहीं सकती। मैं बार - बार , बार - बार समझाता हूँ अपने को दीनहीन अकिंचन मानो , किन्तु यह न सोचो कि नहीं मुझसे तो साधना होगी नहीं। बार - बार सोचो-------
श्री राधे जू हमारी सरकार , फिकिर मोहे काहे की।
जब ऐसी दया दरबार , फिकिर मोहे काहे की। जब ऐसी सरल सुकुमार फिकिर मोहे काहे की।
राधा रानी के गुणों का चिंतन करना ही सबसे बड़ी दवाई है। आश्चर्य होता है , जब सुनता हूँ कि डिप्रेशन हो गया , टैंशन हो गया।
हरि गुरु , पर यदि अविश्वास है तब ही ऐसा होता है। गुरु आज्ञा पालन सहर्ष करते हुये हर श्वास के साथ साथ राधे नाम का जप करते हुये , कोई जीवन व्यतीत करे , तो किसी प्रकार की अशान्ति हो ही नहीं सकती। अशान्ति तो अविवेक का विषय है इसे पास न फटकने दो। चाहे जैसी भी परिस्थिति हो।

जब ऐसी तुम्हारी रखवार फिकिर तोहे काहे की।
........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।

मानव देह क्षणभंगुर है अतः उधार न करो !
Don't procrastinate starting spiritual practice; the human body is temporary and destructible.
......SHRI MAHARAJ JI.

one should be extremely cautious about avoiding all kinds of kusang.
कुसंग से सावधान रहना चाहिये।

---SHRI MAHARAJ JI.

Friday, May 23, 2014

जिन्दगी उसी की महान है, जो हरि-गुरु के सुख में,उनकी सेवा में ही बीतती रहे।
....श्री महाराज जी।

अश्रद्धालु एवं अनाधिकारी से भगवतचर्चा करना कुसंग है।
------श्री महाराजजी।

अन्दर न जाने दें गन्दी चीज़। अन्दर तो केवल भगवान् , उनका नाम , उनका गुण , उनका रूप , उनकी लीला , उनका धाम , उनके संत बस इतने हमारे अंतःकरण में जायें। बाकी को बाहर रखें। चारों ऒर बिठा लो अपने कोई बात नहीं। अन्दर न जाने दो। नहीं तो वैसे ही मन गन्दा है और हो जायेगा। परत की परत मैल जम जायेगी उसमें। यानी प्यार भगवान् के क्षेत्र में ही हो। व्यवहार संसार भर में हो।
........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...