This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Wednesday, July 2, 2014
Tuesday, July 1, 2014
तुझ से विमुख होके गोविन्द राधे।
अति दुःख पाया हरि अब तो क्षमा दे।।
क्षण - क्षण अपना , साधना तथा सेवा में व्यतीत करो। आज का दिन गया, फिर मिले या न मिले, दुबारा मानव देह फिर मिले या न मिले। इस समय तो मानव देह भी मिला है और गुरु भी मिल गया है । फिर भी लापरवाही क्यों ? इससे अच्छा अवसर फिर आसानी से नहीं मिलने वाला, इसका महत्व बार-बार सोचो।
अति दुःख पाया हरि अब तो क्षमा दे।।
क्षण - क्षण अपना , साधना तथा सेवा में व्यतीत करो। आज का दिन गया, फिर मिले या न मिले, दुबारा मानव देह फिर मिले या न मिले। इस समय तो मानव देह भी मिला है और गुरु भी मिल गया है । फिर भी लापरवाही क्यों ? इससे अच्छा अवसर फिर आसानी से नहीं मिलने वाला, इसका महत्व बार-बार सोचो।
........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।
प्रभु से प्रेम करो, प्रभु से प्रेम करो, और सिर्फ प्रभु से प्रेम करो।
वो जो आपकी आँखों से देख रहा है, वो जो आपकी देह को चला रहा है, वो जो आपके दिल में धड़क रहा है, जब धड़कना बंद कर देगा तो बाकी के सब प्रेम समाप्त हो जायेंगे। आपका घर-परिवार, धन-संपत्ति, यार-दोस्त, सगे-संबंधी यहाँ तक कि यह पृथ्वी भी किसी काम नहीं आएगी। वह कौन है जो जन्म से पूर्व आपके साथ था, और मृत्यु के पश्चात भी साथ रहेगा, जो कभी साथ नहीं छोड़ेगा। उस प्रेमियों के प्रेमी से परिचय, मित्रता और प्रेम करना ही सार्थक है।
वो जो आपकी आँखों से देख रहा है, वो जो आपकी देह को चला रहा है, वो जो आपके दिल में धड़क रहा है, जब धड़कना बंद कर देगा तो बाकी के सब प्रेम समाप्त हो जायेंगे। आपका घर-परिवार, धन-संपत्ति, यार-दोस्त, सगे-संबंधी यहाँ तक कि यह पृथ्वी भी किसी काम नहीं आएगी। वह कौन है जो जन्म से पूर्व आपके साथ था, और मृत्यु के पश्चात भी साथ रहेगा, जो कभी साथ नहीं छोड़ेगा। उस प्रेमियों के प्रेमी से परिचय, मित्रता और प्रेम करना ही सार्थक है।
प्रश्न: परमार्थ के पथ पर चलने वाले साधक को क्या अपने भविष्य की चिंता करनी चाहिए ?
उत्तर: श्री महाराजजी द्वारा :- नहीं। क्योंकि जो कुछ प्रारब्ध में होगा वही उसे प्राप्त होगा । परमार्थ के पथ पर चलने वाले को चिंता किस बात की ,अगर कोई कहे की भविष्य की चिंता नहीं करेंगे तो मर जाएंगे ,यह कैसे हो सकता है ,जब भगवान के वो शरणागत है और शरणागत का योगक्षेम स्वयं भगवान वहन करते हैं।
उत्तर: श्री महाराजजी द्वारा :- नहीं। क्योंकि जो कुछ प्रारब्ध में होगा वही उसे प्राप्त होगा । परमार्थ के पथ पर चलने वाले को चिंता किस बात की ,अगर कोई कहे की भविष्य की चिंता नहीं करेंगे तो मर जाएंगे ,यह कैसे हो सकता है ,जब भगवान के वो शरणागत है और शरणागत का योगक्षेम स्वयं भगवान वहन करते हैं।
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...
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Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
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गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






