Thursday, July 3, 2014

हम तो प्रत्येक साधक को आगे ले चलना चाहते हैं और ले जायेंगे,यदि वह स्वयं चलना बंद न कर दे।
------ "कृपालु"!

मन में निश्चय करो की हमारा लक्ष्य हरि-गुरु सेवा ही रहे, हम उनके लिए ही सब कार्य करें, उन्हीं के लिए ही जियें और अंत में भगवान का स्मरण करते हुए ही इस नश्वर शरीर को त्याग कर भगवान के श्रीचरणों में चलें जाएँ ।
जय श्री राधे।

मानव देह मिला, वास्तविक गुरु मिले, संसार से प्रथक हो गये, हरि-गुरु सेवा भी मिली, इतनी कृपा तो करोड़ों जीवों में से किसी एक को भी नहीं मिलती। अत: क्षण-क्षण सावधान रहो।
--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

Wednesday, July 2, 2014

The word "Bhakti" is made from the root "Bhaj" which means "To Serve". Service to God and Guru is thus the highest expression of Bhakti. "The most powerful way of purifying the heart is to keep the mind in God, and increase the desire to serve Him."
.........SHRI MAHARAJJI.


बचपन में ही भक्ति में लग जाओ तो युवा अवस्था का नशा हावी नहीं होगा,फ़िर संस्कार बन जायेंगे तो भगवान की और युवा अवस्था में भी चलोगे।
.........श्री महाराजजी।


'Guru Poornima Sadhana' at Bhakti Dham, Mangarh. Guru Purnima will be celebrated on 12th of july. All are invited at Bhakti Dham,Mangarh.
RADHEY-RADHEY.

अनंत जन्मों से हम गंदगी खा रहे हैं ,विष पीने का इतना अधिक अभ्यास पड़ गया है कि अमृत पीना अच्छा नहीं लगता।
..........श्री महाराज जी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...