This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Saturday, July 19, 2014
"हम
लोगो ने कभी नहीं सोचा,कि ये मानव देह की क्या इम्पोर्टेंस(importance)
है....हम देख तो रहे हें, एक गढ़े में, करोडो कीड़े कैसा जीवन बिता रहे
है....हम भी कभी वही थे......
एक जंगल का प्राणी, भूख के मारे मर जाता है, पानी के मारे मर जाता है, उससे बलवान प्राणी उसको खा जाता है, वो कुछ नहीं कर सकता...ये सब हम लोग देख रहे है आँख से, कि हम भी उन सब योनियों में जा चुके है और वे सब दुःख भोग चुके है और हम फिर वही गलती कर रहे है, कि मानव देह पाकर और इस देह का महत्व realize नहीं करते, महसूस नहीं करते....
और फिर मानव देह मिल भी गया है...आज ७ अरब(7 Billion) आदमी है हमारी दुनिया में , १९३ देश(193 countries) है..१९३ देशो की आबादी ७ अरब...मनुष्यो की ......
कितने आदमियों को तत्वज्ञान दिया है किसी गुरु ने ??...
सोचिये अकेले में......
ये सौभग्य कितने लोगो को मिला है, शायद ७ करोड़ भी नहीं होंगे ऐसे...जिनको पूरा पूरा ज्ञान हो गया हो....हम कौन है?, हमें क्या करना है? और हमारा लक्ष्य क्या है और वो कैसे मिलेगा?
ये ज्ञान बेठ गया हो...किसी को थोडा सा ज्ञान है, बिचारे को कम मौका मिला है, किसी को गलत ज्ञान है, उसने बहोत मेहनत की है लेकिन उसका गाइड(Guide) गलत था, इसलिए गलत ज्ञान हो गया, गलत साधना कर रहा है जिंदगी भर.....तो बार बार सोचिये की हम कितने सौभाग्यशाली है और इस देह का महत्व realize करो क्षण क्षण...!!!!!!"
.........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।
एक जंगल का प्राणी, भूख के मारे मर जाता है, पानी के मारे मर जाता है, उससे बलवान प्राणी उसको खा जाता है, वो कुछ नहीं कर सकता...ये सब हम लोग देख रहे है आँख से, कि हम भी उन सब योनियों में जा चुके है और वे सब दुःख भोग चुके है और हम फिर वही गलती कर रहे है, कि मानव देह पाकर और इस देह का महत्व realize नहीं करते, महसूस नहीं करते....
और फिर मानव देह मिल भी गया है...आज ७ अरब(7 Billion) आदमी है हमारी दुनिया में , १९३ देश(193 countries) है..१९३ देशो की आबादी ७ अरब...मनुष्यो की ......
कितने आदमियों को तत्वज्ञान दिया है किसी गुरु ने ??...
सोचिये अकेले में......
ये सौभग्य कितने लोगो को मिला है, शायद ७ करोड़ भी नहीं होंगे ऐसे...जिनको पूरा पूरा ज्ञान हो गया हो....हम कौन है?, हमें क्या करना है? और हमारा लक्ष्य क्या है और वो कैसे मिलेगा?
ये ज्ञान बेठ गया हो...किसी को थोडा सा ज्ञान है, बिचारे को कम मौका मिला है, किसी को गलत ज्ञान है, उसने बहोत मेहनत की है लेकिन उसका गाइड(Guide) गलत था, इसलिए गलत ज्ञान हो गया, गलत साधना कर रहा है जिंदगी भर.....तो बार बार सोचिये की हम कितने सौभाग्यशाली है और इस देह का महत्व realize करो क्षण क्षण...!!!!!!"
.........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।
The
Divine Love that is the goal of human life cannot be stolen since God
and Guru are all-knowing. It cannot be robbed since God and Guru are
all-powerful. It can only be begged for. And it is God's law that anyone
who begs for it with 100% sincerity is guaranted to get it.
......JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
......JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
When
you have faith in someone, you begin to like him. When you like him
more, you begin to love him. When you love him, you like to serve him.
When you serve him, you become humble and like to be near him, and all
that ends up in deep affinity. A true affinity has no demands and no
requisites. There is only one desire: to love him and to serve him and
to make him happy, because you feel happy in his happiness. Such
feelings for Radha Krishn is Bhakti.
........JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHAPRABHU.
........JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHAPRABHU.
श्रवण कीर्तन स्मरण ही है ,प्रमुख साधन प्यारे।
स्मरण ही को साधना का, प्राण मानो प्यारे।।
सकल दुख का मूल है इक, हरि विमुखता प्यारे।
हरिहि सन्मुखता है याकी, एक औषधि प्यारे।।
स्मरण ही को साधना का, प्राण मानो प्यारे।।
सकल दुख का मूल है इक, हरि विमुखता प्यारे।
हरिहि सन्मुखता है याकी, एक औषधि प्यारे।।
स्मरणयुक्त नित रोके माँगो,प्रेम हरि का प्यारे।
उनके सुख को मानु निज सुख लक्ष्य यह रखु प्यारे।।
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।
उनके सुख को मानु निज सुख लक्ष्य यह रखु प्यारे।।
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।
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