Saturday, July 19, 2014

श्रीकृष्ण, उनके नाम, उनके गुण, उनकी लीला, उनके धाम, उनके संतजनो में पूर्ण अभेद मानना है। यह सब श्री कृष्ण ही है।
........श्री महाराज जी।

जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु के श्रीमुख से:-
'स्मरण',एक मिनट तो क्या एक क्षण से शुरू होता है, इसे बढ़ाना ही साधना है। इस एक क्षण के स्मरण को मरण तक बढ़ाते रहना है। यह एक क्षण का स्मरण जब एक क्षण को भी विस्मृत न हो ,यही लक्ष्य की सिद्धि है।

सूर्य के उदय होते ही प्रकाश पा कर वस्तुएँ दिखायी देने लगती हैं। इसी प्रकार संत साधक को दिव्य द्रष्टि प्रदान कर हरि का प्रत्यक्ष दर्शन करा देते हैं।
*********जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाप्रभु।

"हम लोगो ने कभी नहीं सोचा,कि ये मानव देह की क्या इम्पोर्टेंस(importance) है....हम देख तो रहे हें, एक गढ़े में, करोडो कीड़े कैसा जीवन बिता रहे है....हम भी कभी वही थे......
एक जंगल का प्राणी, भूख के मारे मर जाता है, पानी के मारे मर जाता है, उससे बलवान प्राणी उसको खा जाता है, वो कुछ नहीं कर सकता...ये सब हम लोग देख रहे है आँख से, कि हम भी उन सब योनियों में जा चुके है और वे सब दुःख भोग चुके है और हम फिर वही गलती कर रहे है, कि मानव देह पाकर और इस देह का महत्व realize नहीं करते, महसूस नहीं करते....
और फिर मानव देह मिल भी गया है...आज ७ अरब(7 Billion) आदमी है हमारी दुनिया में , १९३ देश(193 countries) है..१९३ देशो की आबादी ७ अरब...मनुष्यो की ......
कितने आदमियों को तत्वज्ञान दिया है किसी गुरु ने ??...
सोचिये अकेले में......
ये सौभग्य कितने लोगो को मिला है, शायद ७ करोड़ भी नहीं होंगे ऐसे...जिनको पूरा पूरा ज्ञान हो गया हो....हम कौन है?, हमें क्या करना है? और हमारा लक्ष्य क्या है और वो कैसे मिलेगा?
ये ज्ञान बेठ गया हो...किसी को थोडा सा ज्ञान है, बिचारे को कम मौका मिला है, किसी को गलत ज्ञान है, उसने बहोत मेहनत की है लेकिन उसका गाइड(Guide) गलत था, इसलिए गलत ज्ञान हो गया, गलत साधना कर रहा है जिंदगी भर.....तो बार बार सोचिये की हम कितने सौभाग्यशाली है और इस देह का महत्व realize करो क्षण क्षण...!!!!!!"
.........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।

जीवन क्षणभंगुर है, अपने जीवन का क्षण क्षण हरि-गुरु के स्मरण में ही व्यतीत करो, अनावश्यक बातें करके समय बरबाद न करो। कुसंग से बचो, कम से कम लोगो से संबंध रखो, काम जितना जरूरी हो बस उतना बोलो।
-----श्री महाराज जी।

परमार्थ के मार्ग पर चलने वाले को भविष्य की चिन्ता कैसे? वह तो भगवान के शरणागत है,और शरणागत जीव का योगक्षेम भगवान स्वयं वहन करते हैं।
..........श्री महाराज जी।

The Divine Love that is the goal of human life cannot be stolen since God and Guru are all-knowing. It cannot be robbed since God and Guru are all-powerful. It can only be begged for. And it is God's law that anyone who begs for it with 100% sincerity is guaranted to get it.
......JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...