Sunday, July 20, 2014

मैं आप लोगो से फिर से निवेदन करता हूँ,आज्ञा देता हूँ कि खाली समय का सदुपयोग करें,काम में ले,कुछ कमा ले,'राधे' नाम का जाप करें। मेरी बात पर विश्वास करके अगर दस दिन कर लिया तो आदत पड़ जायेगी,फिर 'राधे' जाप के बिना रहा नहीं जायेगा। कुछ दिन जबरदस्ती किसी चीज का अभ्यास कर लो,फिर आदत पड़ जाती है,अपना खाली समय काम में लो।
........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।

If you have Shri Krishna and nothing else, you have everything. If you have everything but not Shri Krishna, you have nothingl. Shri Krishna is your greatest wealth. No one can steal this wealth from you, nor can anyone rob you of it.
----SHRI MAHARAJ JI.

''हमारे श्री महाराजजी की वाणी सनातन वेद वाणी है। उनके श्रीमुख से नि:सृत एक-एक शब्द, उपदेश साक्षात भगवान श्री कृष्ण के ही उपदेश हैं। हमें उन्हे विश्वास एवं श्रद्धा से हृदयंगम करना चाहिये।''

साधक ने अपनी बुद्धि को जब महापुरुष एवं भगवान् के ही हाथ बेचा है , तब उसे अपनी बुद्धि को महापुरुष के आदेश से ही सम्बद्ध रखना चाहिये। लोक में भी देखो , एक कूपमण्डूक अत्यन्त मूर्ख ग्रामीण भी , अपने मुकदमे में किसी व्युत्पन्न वकील के द्वारा प्रमुख कानूनी विषयों को अपनी बुद्धि में रखकर धुरन्धर वकील की जिरह में भी नहीं उखड़ता।
****** श्री महाराज जी।

Saturday, July 19, 2014

BHAKTI is not the physical act of observing the worshipping formalities or doing jap without meditation.It is the affinity of your heart which sprouts longing for your divine beloved Radhakrishn.
.......SHRI MAHARAJ JI..

श्रीकृष्ण, उनके नाम, उनके गुण, उनकी लीला, उनके धाम, उनके संतजनो में पूर्ण अभेद मानना है। यह सब श्री कृष्ण ही है।
........श्री महाराज जी।

जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु के श्रीमुख से:-
'स्मरण',एक मिनट तो क्या एक क्षण से शुरू होता है, इसे बढ़ाना ही साधना है। इस एक क्षण के स्मरण को मरण तक बढ़ाते रहना है। यह एक क्षण का स्मरण जब एक क्षण को भी विस्मृत न हो ,यही लक्ष्य की सिद्धि है।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...