Sunday, August 3, 2014

EID MUBARAK TO ALL DEAR FRIENDS ACROSS THE GLOBE...
RADHE-RADHE.

ISLAM DHARM AUR JAGADGURU SHREE KRIPALUJI MAHARAJ
'इस्लाम' शब्द का अर्थ क्या है ? इस्लाम लब्ज-सल्म लब्ज से बना है. सल्म अरबी शब्द है इस लब्ज का अर्थ है खुदा को अर्पित अर्थात इस्लाम शब्द ही का अर्थ है, जो इन्सान खुदा को अर्पित हो जाये,सर्वसमर्पण कर दे वह इस्लाम धर्म को मानने वाला है।
भगवान दो नहीं हुआ करते, खुदा अनेक नहीं होता,वो एक ही है और जितने इन्सान उसने बनाये है वे किसी उद्देश्य से बनाये है -
मा ख़लक तल इन्स व जिन्न इल्लाले आबदून।
कुरान में कहा गया है कि इंसान को इसलिये बनाया है कि वो खुदा को अर्पित हो, उसी क़ी इबादत करे और सही सही इबादत करे, खुदा से ही जिसकी मुहबत हो। इन्स लब्ज है अरबी में, उससे इन्सान बना. इसका मतलब ही यह होता है कि जो खुदा कि इबादत करे उनका नाम इन्सान।
......जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।
इस्लाम धर्मानुयायी भी श्री महाराजजी के स्नेहमय व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उनके पास आकर अपूर्व आनंद का अनुभव करते है। कुरान शरीफ और हिन्दू धर्म ग्रंथो का अपूर्व समन्वय सुनकर आश्चर्य चकित हो जाते है कि इस्लाम धर्म का भी सही सही ज्ञान महाराजजी जैसा कोई नहीं दे सकता. महाराजजी भी उन्हें गले लगाते हुये प्रेम रस से सराबोर कर देते है।

HAPPY FRIENDSHIP DAY TO ALL DEAR SATSANGEES ALL OVER THE WORLD.........
RADHEY-RADHEY.

आज है फ्रेंडशिप डे , गोविन्द राधे!
साँचो फ्रेंड हरि गुरु, बस दो हैं बता दे !!

आज फ्रेंडशिप डे पे हे गोविन्द राधे !
मेरी मति धृति को अपना बना दे !!

तेरी मेरी यारी यार , गोविन्द राधे !
चोरी चोरी कब तक चलेगी बता दे !!

तेरी मेरी लुका छिपी , गोविन्द राधे !
मेरे साथ कब तक चलेगी बता दे !!

तेरी मेरी यारी यार , गोविन्द राधे !
कबहूँ न छूटे टूटे , चाहे जोर लगा दे !!

तेरे मेरे बीच में हे गोविन्द राधे !
जो भी आये वाको तू आँख दिखा दे !!

........श्री महाराज जी।

मेरी राधा रमण सो यारी , तन मन धन उन पर वारी !
मेरी राधा रमण सो यारी , मेरी यारी जगत सों न्यारी !
मेरी राधा रमण सो यारी , क्या समझेगा कोउ संसारी !
मेरी राधा रमण सो यारी, मेरी यारी पै यार बलिहारी !
मेरी राधा रमण सो यारी, मेरी यारी परी वाय भारी !
..........श्री महाराज जी।

Saturday, August 2, 2014

O mind! It is selfish desire which drives the entire world. Take a bumblebee, which hovers around a flower humming in appreciation as long as it emits fragrance. But, when that same flower withers and falls to the ground, the bee will not even look at it, even by mistake. Similarly, one’s son, wife, friend, husband or any other worldly relation, maintains their relationship with you simply to fulfil their own selfish ends. This fact needs to be pondered over deeply.
.........JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.


HAPPY NAAG PANCHMI TO ALL DEAR FRIENDS ACROSS THE GLOBE.
RADHEY-RADHEY.

भगवत्कृपा का सबसे पक्का प्रमाण, भगवज्जन मिलन है, कृपा से लाभ लेना तभी संभव है, जब इस कृपा को बार-बार चिन्तन में लाया जाय। भगवज्जन का यदि दर्शन मात्र प्राप्त हो जाय तो बार-बार चिन्तन कर आनन्द विभोर होना चाहिए । क्योंकि उसके दर्शन को पाने या दिलाने की सामर्थ्य किसी भी साधना में नहीं है । यदि दर्शन के अतिरिक्त और भी सामीप्य मिल जाय फिर तो बात ही क्या है । यदि उस अमूल्य निधि को पाकर भी साधारण भावना या चिन्तन रहा तो महान् कृतघ्नता एवं महान् दुर्भाग्य ही होगा, क्योंकि इससे अधिक हमें क्या पाना शेष है ।
.......जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

कभी यह न सोचो कृपा की कमी है, कमी जो है वह हममें ही है | महापुरुष शरणागत के लिये क्या-क्या भगीरथ प्रयत्न करता है, यह तो भगवत्प्राप्ति होने पर ही साधक को समझ में आ सकता है | सब लोग कमरा बन्द करके सोचें तो पायेंगे कि मेरा कितना कायापलट हो गया ? मैं कहाँ जा रहा था, कहाँ से कहाँ ला कर खड़ा कर दिया महाराज जी ने ?
-----------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...