Sunday, August 3, 2014

तुम लोगों के अन्दर मैं ऐसा बैठ गया हूँ कि तुम लोग कितना ही प्रयत्न करो , घूम फिर कर आओगे यहीं ! फिर बेकार चिन्तन क्यों करते हो ? अगर तुम कहो कि आप अन्दर बैठे हैं किन्तु दीखते तो नहीं ? बाहरी द्रष्टि में आना बहुत छोटी चीज है किन्तु अन्दर बैठ जाना बहुत बड़ी बात है ! यह आवश्यक नहीं है कि जो माँ अपने बच्चे को बहुत प्यार करती हो और उसे बच्चा प्रतिक्षण देखता हो ।
...........जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाप्रभु।

श्रीकृष्ण, उनके नाम, उनके गुण, उनकी लीला, उनके धाम, उनके संतजनो में पूर्ण अभेद मानना है। यह सब श्री कृष्ण ही है।

एक लफ्ज़ मोहब्बत बोया था .........!
एक फसल जुदाई काटी है ........!!
राधे-राधे।

हम लोगो ने अनादी काल से अब तक एक गलती कि की अपने को शरीर मान लिया और शरीर के माँ-बाप,भ्राता, सखा, पुत्र आदि को अपना मान लिया. अब इस गलती को समाप्त करना है. हमारे सब कुछ श्री कृष्ण है. वेद कहता है।
अमृतस्य वै पुत्राः
अर्थात सभी जीव एकमात्र श्री कृष्ण के पुत्र ही है. इतना ही नहीं वरन वेद कहता है की श्री कृष्ण ही जीव के पिता, माता, भ्राता, सखा, पुत्र, प्रियतम, गति आदि सब कुछ है।
केवल श्रीकृष्ण सुखैक भक्ति ही तुम्हारा चरम लक्ष्य है। हमारी माता, पिता,भ्राता,प्रियतम सब नाता श्री कृष्ण भगवान से ही रखना है, संसार से नहीं, संसार में मन का प्रवेश न होने पावे।

--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

EID MUBARAK TO ALL DEAR FRIENDS ACROSS THE GLOBE...
RADHE-RADHE.

ISLAM DHARM AUR JAGADGURU SHREE KRIPALUJI MAHARAJ
'इस्लाम' शब्द का अर्थ क्या है ? इस्लाम लब्ज-सल्म लब्ज से बना है. सल्म अरबी शब्द है इस लब्ज का अर्थ है खुदा को अर्पित अर्थात इस्लाम शब्द ही का अर्थ है, जो इन्सान खुदा को अर्पित हो जाये,सर्वसमर्पण कर दे वह इस्लाम धर्म को मानने वाला है।
भगवान दो नहीं हुआ करते, खुदा अनेक नहीं होता,वो एक ही है और जितने इन्सान उसने बनाये है वे किसी उद्देश्य से बनाये है -
मा ख़लक तल इन्स व जिन्न इल्लाले आबदून।
कुरान में कहा गया है कि इंसान को इसलिये बनाया है कि वो खुदा को अर्पित हो, उसी क़ी इबादत करे और सही सही इबादत करे, खुदा से ही जिसकी मुहबत हो। इन्स लब्ज है अरबी में, उससे इन्सान बना. इसका मतलब ही यह होता है कि जो खुदा कि इबादत करे उनका नाम इन्सान।
......जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।
इस्लाम धर्मानुयायी भी श्री महाराजजी के स्नेहमय व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उनके पास आकर अपूर्व आनंद का अनुभव करते है। कुरान शरीफ और हिन्दू धर्म ग्रंथो का अपूर्व समन्वय सुनकर आश्चर्य चकित हो जाते है कि इस्लाम धर्म का भी सही सही ज्ञान महाराजजी जैसा कोई नहीं दे सकता. महाराजजी भी उन्हें गले लगाते हुये प्रेम रस से सराबोर कर देते है।

HAPPY FRIENDSHIP DAY TO ALL DEAR SATSANGEES ALL OVER THE WORLD.........
RADHEY-RADHEY.

आज है फ्रेंडशिप डे , गोविन्द राधे!
साँचो फ्रेंड हरि गुरु, बस दो हैं बता दे !!

आज फ्रेंडशिप डे पे हे गोविन्द राधे !
मेरी मति धृति को अपना बना दे !!

तेरी मेरी यारी यार , गोविन्द राधे !
चोरी चोरी कब तक चलेगी बता दे !!

तेरी मेरी लुका छिपी , गोविन्द राधे !
मेरे साथ कब तक चलेगी बता दे !!

तेरी मेरी यारी यार , गोविन्द राधे !
कबहूँ न छूटे टूटे , चाहे जोर लगा दे !!

तेरे मेरे बीच में हे गोविन्द राधे !
जो भी आये वाको तू आँख दिखा दे !!

........श्री महाराज जी।

मेरी राधा रमण सो यारी , तन मन धन उन पर वारी !
मेरी राधा रमण सो यारी , मेरी यारी जगत सों न्यारी !
मेरी राधा रमण सो यारी , क्या समझेगा कोउ संसारी !
मेरी राधा रमण सो यारी, मेरी यारी पै यार बलिहारी !
मेरी राधा रमण सो यारी, मेरी यारी परी वाय भारी !
..........श्री महाराज जी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...