Friday, August 8, 2014

You should continue to practice thinking that God is with you and He is very close to you.
यह अभ्यास करना चाहिए की श्याम सुन्दर मेरे साथ हैं, मेरे पास हैं|
------SHRI MAHARAJ JI.
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यह अभ्यास करना चाहिए की श्याम सुन्दर मेरे साथ हैं, मेरे पास हैं|
------SHRI MAHARAJ JI.

सब साधन जनु देह सम, रूपध्यान जनु प्राण राधे राधे।
खात गीध अरु स्वान जनु ,कामादिक शव मान राधे राधे।।

श्री कृष्ण की प्राप्ति की समस्त साधनाएँ यम,नियम,कर्म,योग,ज्ञान,व्रतादि प्राणहीन शव के समान है, यदि रूपध्यान रहित है।

All spiritual practices for attaining Shri Krishna such as Gyan, Karma, Yoga, Austerities, and Rituals are like a dead body without a soul if they are done without Roop Dhyan -the loving remembrance of Krishna's form.

--------SHRI MAHARAJ JI.
Photo: सब साधन जनु देह सम, रूपध्यान जनु प्राण राधे राधे।
खात गीध अरु स्वान जनु ,कामादिक शव मान राधे राधे।।

श्री कृष्ण की प्राप्ति की समस्त साधनाएँ यम,नियम,कर्म,योग,ज्ञान,व्रतादि प्राणहीन शव के समान है, यदि रूपध्यान रहित है।

All spiritual practices for attaining Shri Krishna such as Gyan, Karma, Yoga, Austerities, and Rituals are like a dead body without a soul if they are done without Roop Dhyan -the loving remembrance of Krishna's form.

--------SHRI MAHARAJ JI.

सबसे बड़ा उपकार यही है कि कोई जीव किसी अन्य जीव को भगवान की तरफ,गुरु की तरफ मोड़ दे,अर्थात उसे अपने गुरु की बाते बताये।उनसे मिलाये।
.......श्री महाराजजी।
Photo: सबसे बड़ा उपकार यही है कि कोई जीव किसी अन्य जीव को भगवान की तरफ,गुरु की तरफ मोड़ दे,अर्थात उसे अपने गुरु की बाते बताये।उनसे मिलाये।
.......श्री महाराजजी।

यह तो संसार है इसमे सब कुछ कहने वाले लोग हैं ,सही भी,गलत भी। फिर गलत कहने वाले तो 99 परसेंट(percent) हैं, सत्वगुणी बुद्धि हुई तो सत्व गुणी बात कहने लगे, रजोगुणी बुद्धि हुई तो हमारा निर्णय रजोगुणी हो गया, तमोगुणी बुद्धि हुई तो एक दम से तमोगुण बात बोलने लगे। इसलिये जब हमारी स्वयं की बुद्धि ही एक सी नहीं रहती तो दूसरों से हम क्यों आशा करते हैं कि वह हमारी बात का समर्थन ही करेगा। ये कभी सतयुग में नहीं हुआ,त्रेतायुग में नहीं हुआ,द्वापर में नहीं हुआ,फ़िर आज क्यों होगा? सारे संतों ने इसलिए लिखा "तुम किसी की और मत देखो न किसी की सुनों बस,अपना काम करो।"
............जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।
Photo: यह तो संसार है इसमे सब कुछ कहने वाले लोग हैं ,सही भी,गलत भी। फिर गलत कहने वाले तो 99 परसेंट(percent) हैं, सत्वगुणी बुद्धि हुई तो सत्व गुणी बात कहने लगे, रजोगुणी बुद्धि हुई तो हमारा निर्णय रजोगुणी हो गया, तमोगुणी बुद्धि हुई तो एक दम से तमोगुण बात बोलने लगे। इसलिये जब हमारी स्वयं की बुद्धि ही एक सी नहीं रहती तो दूसरों से हम क्यों आशा करते हैं कि वह हमारी बात का समर्थन ही करेगा। ये कभी सतयुग में नहीं हुआ,त्रेतायुग में नहीं हुआ,द्वापर में नहीं हुआ,फ़िर आज क्यों होगा? सारे संतों ने इसलिए लिखा "तुम किसी की और मत देखो न किसी की सुनों बस,अपना काम करो।"
............जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।

भगवान् मन बुद्धि से परे हैं ! यदि गुरु कृपा हो जाय तो जीव भगवान् को जान सकता है !
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
Photo: भगवान् मन बुद्धि से परे हैं ! यदि गुरु कृपा हो जाय तो जीव भगवान् को जान सकता है !
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

We have been turning away from God since time immemorial. As a result, we are clutched by Maya. The cure for this is to turn towards God by doing devotion to a genuine Guru.
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Let's practice feeling deep gratitude towards God for all the Graces we have received from Him. "Thank you God for your infinite compassion" As we progress in our appreciation of all the Graces He bestows upon us, we will automatically enhance love for God in our hearts.
............SHRI MAHARAJ JI.
Photo: Let's practice feeling deep gratitude towards God for all the Graces we have received from Him. "Thank you God for your infinite compassion" As we progress in our appreciation of all the Graces He bestows upon us, we will automatically enhance love for God in our hearts.
............SHRI MAHARAJ JI.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...