Friday, August 8, 2014

यह तो संसार है इसमे सब कुछ कहने वाले लोग हैं ,सही भी,गलत भी। फिर गलत कहने वाले तो 99 परसेंट(percent) हैं, सत्वगुणी बुद्धि हुई तो सत्व गुणी बात कहने लगे, रजोगुणी बुद्धि हुई तो हमारा निर्णय रजोगुणी हो गया, तमोगुणी बुद्धि हुई तो एक दम से तमोगुण बात बोलने लगे। इसलिये जब हमारी स्वयं की बुद्धि ही एक सी नहीं रहती तो दूसरों से हम क्यों आशा करते हैं कि वह हमारी बात का समर्थन ही करेगा। ये कभी सतयुग में नहीं हुआ,त्रेतायुग में नहीं हुआ,द्वापर में नहीं हुआ,फ़िर आज क्यों होगा? सारे संतों ने इसलिए लिखा "तुम किसी की और मत देखो न किसी की सुनों बस,अपना काम करो।"
............जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।
Photo: यह तो संसार है इसमे सब कुछ कहने वाले लोग हैं ,सही भी,गलत भी। फिर गलत कहने वाले तो 99 परसेंट(percent) हैं, सत्वगुणी बुद्धि हुई तो सत्व गुणी बात कहने लगे, रजोगुणी बुद्धि हुई तो हमारा निर्णय रजोगुणी हो गया, तमोगुणी बुद्धि हुई तो एक दम से तमोगुण बात बोलने लगे। इसलिये जब हमारी स्वयं की बुद्धि ही एक सी नहीं रहती तो दूसरों से हम क्यों आशा करते हैं कि वह हमारी बात का समर्थन ही करेगा। ये कभी सतयुग में नहीं हुआ,त्रेतायुग में नहीं हुआ,द्वापर में नहीं हुआ,फ़िर आज क्यों होगा? सारे संतों ने इसलिए लिखा "तुम किसी की और मत देखो न किसी की सुनों बस,अपना काम करो।"
............जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।

भगवान् मन बुद्धि से परे हैं ! यदि गुरु कृपा हो जाय तो जीव भगवान् को जान सकता है !
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
Photo: भगवान् मन बुद्धि से परे हैं ! यदि गुरु कृपा हो जाय तो जीव भगवान् को जान सकता है !
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

We have been turning away from God since time immemorial. As a result, we are clutched by Maya. The cure for this is to turn towards God by doing devotion to a genuine Guru.
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Let's practice feeling deep gratitude towards God for all the Graces we have received from Him. "Thank you God for your infinite compassion" As we progress in our appreciation of all the Graces He bestows upon us, we will automatically enhance love for God in our hearts.
............SHRI MAHARAJ JI.
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............SHRI MAHARAJ JI.

इस धराधाम पर अनन्त बार श्रीहरि के अवतार हुये परन्तु अपने मन के दोष के कारण यह जीव कभी उनकी कृपा का पात्र नहीं बन सका ! ब्रह्म श्रीकृष्ण को भी यहाँ चोर - जार की उपाधि से विभूषित किया गया ! श्रीकृष्ण के अवतार काल में मिथ्या वासुदेव भी था जिसने दो नकली भुजाएं लगा ली थीं ! उनके श्रीकृष्ण के पास संदेश भेजा था कि असली वासुदेव मैं हूँ , तुम नहीं हो !
..........श्री महाराज जी।
Photo: इस धराधाम पर अनन्त बार श्रीहरि के अवतार हुये परन्तु अपने मन के दोष के कारण यह जीव कभी उनकी कृपा का पात्र नहीं बन सका ! ब्रह्म श्रीकृष्ण को भी यहाँ चोर - जार की उपाधि से विभूषित किया गया ! श्रीकृष्ण के अवतार काल में मिथ्या वासुदेव भी था जिसने दो नकली भुजाएं लगा ली थीं ! उनके श्रीकृष्ण के पास संदेश भेजा था कि असली वासुदेव मैं हूँ , तुम नहीं हो !
..........श्री महाराज जी।

"अरे कृतघ्न मन! धिक्कार है तुझे! जिसने तुझ नीच,अकिंचन व अधम को अपने श्रीचरणों में स्थान दिया, तूने उस शरण्य की कृपा को भुला दिया। उनको ही दुखी करने लगा। सच है जहाँ कृपालुता, क्षमाशीलता की पराकाष्ठा है, वहीं तूने अधमता व अपराधशीलता की पराकाष्ठा की है। क्यों न आज से तू अपने प्यारे प्रभु को ही प्रसन्न करने का एक मात्र बीड़ा उठाकर चल।"

The Sadhak needs to constantly try to divert his mind from the material world to pure thoughts of God and Guru.
When the mind does briefly get absorbed in loving thoughts of Radha Krishna and Guru, it is only due to their kind Grace. Else the nature of the mind is only to wander in the material world.
......JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...