This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Saturday, August 9, 2014
"मनुष्य का शरीर' 'श्रद्धा' और 'महापुरुष की प्राप्ति' इन तीन चीजों का मिलना अत्यंत दुर्लभ है।
'मनुष्य शरीर' और 'महापुरुष' मिल भी जाये तो तीसरी चीज 'श्रद्धा' मिलना अत्यधिक दुर्लभ है। अनादिकाल से इसी में गड़बड़ी हुई है। अनंत संत हमें मिलें लेकिन हमारी उनके प्रति श्रद्धा नहीं हुई इसलिए हमारा लक्ष्य हमें प्राप्त नहीं हुआ।
पहले श्रद्धा, उसके बाद साधु संग, फिर भक्ति करो - ये नियम है।
-----जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।"
'मनुष्य शरीर' और 'महापुरुष' मिल भी जाये तो तीसरी चीज 'श्रद्धा' मिलना अत्यधिक दुर्लभ है। अनादिकाल से इसी में गड़बड़ी हुई है। अनंत संत हमें मिलें लेकिन हमारी उनके प्रति श्रद्धा नहीं हुई इसलिए हमारा लक्ष्य हमें प्राप्त नहीं हुआ।
पहले श्रद्धा, उसके बाद साधु संग, फिर भक्ति करो - ये नियम है।
-----जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।"

जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज के श्रीमुख से नि:सृत अमृत वचन.................
श्री महाराजजी बताते हैं की "श्यामा-श्याम" के लिए एक आँसू बहाने से वे हजार आँसू बहाते हैं। काश! की मेरी इस वाणी पर आप विश्वास कर लेते तो आँसू बहाते न थकते। अरे उसमें हमारा खर्च क्या होता है। उसमें क्या कुछ अकल लगाना है। क्या उसके लिए कोई साधना करनी है? क्या इसमें कोई मेहनत है। क्या यह कोई जप है? तप है? आँसू उनको इतने प्रिय हैं और तुम्हारे पास फ्री हैं। क्यों नहीं फ़िर उनके लिए बहाते हो? निर्भय होकर उनसे कहो कि तुम हमारे होकर भी हमें अबतक क्यों नहीं मिले। तुम बड़े कृपण हो, बड़े निष्ठुर हो, तुमको जरा भी दया नहीं आती क्या? हमारे होकर भी हमें नहीं मिलते हो। इस अधिकार से आँसू बहाओ। हम पतित हैं, अपराधी हैं, तो क्या हुआ। तुम तो 'पतित पावन' हो। फ़िर अभी तक क्यों नहीं मिले? अगर इतने बड़े अधिकार से मन से प्रार्थना करोगे, आँसू बहाओगे, तो वो तुम्हारे एक आँसू पर स्वयं हजार आँसू बहाते हैं।
श्री महाराजजी बताते हैं की "श्यामा-श्याम" के लिए एक आँसू बहाने से वे हजार आँसू बहाते हैं। काश! की मेरी इस वाणी पर आप विश्वास कर लेते तो आँसू बहाते न थकते। अरे उसमें हमारा खर्च क्या होता है। उसमें क्या कुछ अकल लगाना है। क्या उसके लिए कोई साधना करनी है? क्या इसमें कोई मेहनत है। क्या यह कोई जप है? तप है? आँसू उनको इतने प्रिय हैं और तुम्हारे पास फ्री हैं। क्यों नहीं फ़िर उनके लिए बहाते हो? निर्भय होकर उनसे कहो कि तुम हमारे होकर भी हमें अबतक क्यों नहीं मिले। तुम बड़े कृपण हो, बड़े निष्ठुर हो, तुमको जरा भी दया नहीं आती क्या? हमारे होकर भी हमें नहीं मिलते हो। इस अधिकार से आँसू बहाओ। हम पतित हैं, अपराधी हैं, तो क्या हुआ। तुम तो 'पतित पावन' हो। फ़िर अभी तक क्यों नहीं मिले? अगर इतने बड़े अधिकार से मन से प्रार्थना करोगे, आँसू बहाओगे, तो वो तुम्हारे एक आँसू पर स्वयं हजार आँसू बहाते हैं।

Friday, August 8, 2014
Keep
trust with your Guru who has given you spiritual knowledge and practice
devotion according to his instructions. Continue with it either sitting
in your room at home or anywhere you like. Keep your mind ever absorbed
in God and your Guru. Don’t forget them even for a moment.
........JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
........JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.

सब साधन जनु देह सम, रूपध्यान जनु प्राण राधे राधे।
खात गीध अरु स्वान जनु ,कामादिक शव मान राधे राधे।।
श्री कृष्ण की प्राप्ति की समस्त साधनाएँ यम,नियम,कर्म,योग,ज्ञान,व्रतादि प्राणहीन शव के समान है, यदि रूपध्यान रहित है।
All spiritual practices for attaining Shri Krishna such as Gyan, Karma, Yoga, Austerities, and Rituals are like a dead body without a soul if they are done without Roop Dhyan -the loving remembrance of Krishna's form.
--------SHRI MAHARAJ JI.
खात गीध अरु स्वान जनु ,कामादिक शव मान राधे राधे।।
श्री कृष्ण की प्राप्ति की समस्त साधनाएँ यम,नियम,कर्म,योग,ज्ञान,व्रतादि प्राणहीन शव के समान है, यदि रूपध्यान रहित है।
All spiritual practices for attaining Shri Krishna such as Gyan, Karma, Yoga, Austerities, and Rituals are like a dead body without a soul if they are done without Roop Dhyan -the loving remembrance of Krishna's form.
--------SHRI MAHARAJ JI.

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गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...


