Monday, August 11, 2014

Out of 8,400,000 varieties of living beings, humans are the only children of God who have been granted the privilege of performing fruit-bearing actions. Since you cannot undo what you have done already, stop crying over destiny and focus instead on the actions you are free to perform in this life, for they will be called your destiny in the future.
You have tremendous power. All other creatures, including heavenly gods, envy what you have: the power to create your own destiny.
..........SHRI MAHARAJJI.

लगी री मोहिं, श्याम – दृगन की चोट |
पलक न हाय ! पलक – दृग लागत, भये पलक ते ओट |
व्याकुल बिनु अपराध प्रान भये, कीन दृगन ने खोट |
मिल्यो जाय अब मनहुँ दृगन सों, तोरि कानि – कुल – कोट |
अब हौं विलपति प्रति कुंजन, उर, धरे विरह की पोट |
तितनोइ खोट ‘कृपालु’ नंद को, ढोटा, जितनोइ छोट ||

भावार्थ – एक विरहिणी कहती है कि मुझे श्यामसुन्दर की आँखों की चोट ने घायल कर दिया है | अब उनके पलकों से ओट होते ही एक क्षण को भी चैन नहीं पड़ता एवं आँखों की नींद भी चली गयी | यद्यपि लड़कपन या उद्दण्डता मेरी आँखों ने ही की थी, मेरे प्राणों का कोई भी दोष नहीं था | फिर भी ‘और करे अपराध कोउ और पाव फलभोग’ के अनुसार अब प्राण भी अत्यन्त व्याकुल हो रहे हैं | मन ने भी प्राणों से विश्वासघात किया एवं वंश परम्परा के मर्यादा – रूपी किले को तोड़कर आँखों से जा मिला | अब मैं हृदय में विरह का बोझ लिए हुए एवं प्रत्येक कुंज में प्यारे श्यामसुन्दर से मिलन के लिए विलाप करती हुई भटक रही हूँ | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि हाय ! हाय !! यह नन्द ढोटा जितना ही छोटा है उतना ही खोटा भी है |
( प्रेम रस मदिरा विरह - माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति

मन न मनन करे श्याम अरु श्यामा।
नमन न मन करे पद गुरु धामा।।

man na manan kare shyam aru shyama.
naman n man kare pad guru dhama.

My self-willed mind neither meditates on Shyama Shyam nor does it surrender to the Guru.
Shyama Shyam Geet - 88
-Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj.
Radha Govind Samiti.

"काम क्रोध मद लोभ तजहु जनि , भजहु तिनहिं दिन रात"।।
अब कामना यह हो की श्याम सुन्दर मुझे कब मिलेंगे? क्रोध यह हो कि उनके मिलन बिना व्यर्थ में जीवन बीता जा रहा है , लोभ यह हो कि उनसे मेरा निष्काम प्रेम बढ़ता ही जाये। मद यह हो कि हम उनके दास हैं। इस प्रकार सभी कामनाओ को श्याम चरणों में समर्पित करने से और रो रो कर उन्हें पुकारने से हमारा अन्तःकरण शुद्ध हो जायेगा।
..........जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

सबकुछ माँग लिया है , बस तुमको माँग कर........!
उठे नहीं हैं हाथ मेरे , फिर इस दुआ के बाद ..............!!
राधे-राधे।

आज तो है रक्षाबन्धन नन्दनन्दन।
रक्षा करूँ रक्षा करूँ मेरे नन्दनन्दन।।

वजह पूछोगे तो सारी उम्र गुजर जायेगी......!
कहा ना अच्छे लगते हो तो, बस लगते हो.......!!
राधे-राधे।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...