Saturday, September 27, 2014

मन में निश्चय करो की हमारा लक्ष्य भगवान ही रहें, हम भगवान के लिए ही सब काम करें, भगवान के लिए ही जियें और अंत में भगवान का स्मरण करते हुए ही इस नश्वर शरीर को त्याग कर भगवान के चरणों में चलें जाएँ ।
जय श्री राधे।

SANSKAR TV CHANNEL DISCOURSES BY- JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
NEW TIMINGS......
8:35PM - 9:00 IST
As of 1st October 2014

A Saint can only be known by a Saint of the same level, because like God, his true identity cannot be grasped by the material senses, mind and intellect.
.......JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.

Sunday, September 21, 2014

एक साधक का प्रश्न : महाराज जी आप कहते हैं कि मानव शरीर के पश्चात मानवेतर योनियों में जन्म लेना पड़ता है। क्या कोई ऐसी स्थिति है जब किसी के बारे में यह कहा जा सके कि इस जन्म में उसे मानव देह ही मिलेगा।
श्री महाराज जी द्वारा उत्तर : जिस व्यक्ति का चिंतन आधे से अधिक समय में भगवदीय हो जायेगा उसके बारे में यह निश्चित है कि अगला जन्म उसको मानव देह ही मिलेगा।

At bed time, you should keep an account of the offences you have committed during the day.
प्रतिदिन सोते समय सोचो आज हमने कितनी बार अपराध किये।
----SHRI MAHARAJ JI.

Break the Privacy and feel that Shyam Sundar is always with me.
अपनी प्राइवेसी को समाप्त करे और यह फील करे कि मेरे इष्टदेव श्याम सुन्दर सदा मेरे साथ है.
~~~~~~~JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.

प्रथम नमन गुरुवर पुनि गिरिधर ,जोइ श्री गुरुवर सोइ श्री गिरिधर।
हरि गुरु कृपा सदा सब ही पर ,अंतःकरण पात्र पावन कर।
करहु ' कृपालु ' कृपा मोहूँ पर , तन मन धन अर्पण चरनन पर।।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...