Sunday, December 13, 2015

जितने समीप आग के कोई जायेगा उतना ही उसका शीत उसकी ठंडक कम हो जायेगी,उतना ही उसका ताप बढ़ता जायेगा। उसी प्रकार हम जितना भगवान के पास भक्ति के द्वारा जायेंगे, उतनी ही भगवतशक्ति हमको मिलती जायेगी और चूँकि भगवान नित्य शांत ,नित्य आनंदमय है इसलिए उसकी शक्ति से हम भी शांत हो जायेंगे।
-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

The uncontrolled mind is like an enemy. But when we teach it to love God, the mind becomes our best friend.

......JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.

Sunday, December 6, 2015

A message from Shri Maharajji......!!!

Dear friend,
Shree Raseshwari Radha Rani and Krishn are your soul beloved and everything to you. Think of Them very closely that They are fully yours. Don't think of Them as almighty God. They are always waiting to embrace you with Their open arms. Just turn your mind away from worldly attractions and attachments and wholeheartedly look to Them once. That is all you have to do. Then They will become yours and you will become Theirs, forever. They are causelessly Gracious and merciful, They don't expect any spiritual practice from you. It's Their nature to Grace causelessly. Just trust Them and entrust yourself in Their hands forever, They will do everything for you. See, in our history They have redeemed great sinners in this world, then why do you have any hesitation? Trust me, do it once, and see for youself......!!!

Yours, Kripalu.
"काम क्रोध मद लोभ तजहु जनि , भजहु तिनहिं दिन रात"।।
अब कामना यह हो की श्याम सुन्दर मुझे कब मिलेंगे? क्रोध यह हो कि उनके मिलन बिना व्यर्थ में जीवन बीता जा रहा है , लोभ यह हो कि उनसे मेरा निष्काम प्रेम बढ़ता ही जाये। मद यह हो कि हम उनके दास हैं। इस प्रकार सभी कामनाओ को श्याम चरणों में समर्पित करने से और रो रो कर उन्हें पुकारने से हमारा अन्तःकरण शुद्ध हो जायेगा।
..........जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
प्रिय मित्रों...!
जय श्री राधे।
यह नीचे फ़ोटो में जो भी weblinks दिये गए हैं वो "जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज'' के दिव्य तत्वज्ञान, उनकी रसमय वाणी, उनके पद, कीर्तन, फ़ोटो, विडियो, इत्यादि से सजी हुई फुलवारी है, जहाँ परम श्रद्धेय श्री सद्गुरु जी की कृपालुता की सुगंधी हैं, उनकी महक है।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज इस युग के पंचम मूल जगद्गुरु हैं, जिन्हें काशी विद्वत परिषत द्वारा ''जगद्गुरुत्तम'' की उपाधि से विभूषित किया गया है। आज सारा विश्व उनके द्वारा प्रदत्त अद्वितीय तत्वज्ञान और उनके द्वारा लुटाये गए ब्रजरस को पाकर उनका हमेशा-हमेशा के लिए ऋणी हो गया है। सारा विश्व आज गौरवान्वित है जो ऐसे रसिक संत आज हम सबके बीच में हैं और जिन्होंने अपने जीवन का एक-एक क्षण हम पतित जीवों के कल्याणार्थ ही अर्पण कर दिया है, जो हम सबको सबसे बड़ा रस, ब्रजरस और श्री प्रिया-प्रियतम की सेवा दिलाने को, उनका प्रेम दिलाने को आतुर है, उनकी कृपालुता धन्य है, उनका प्रेम धन्य है, उनका धाम धन्य है, उनकी वाणी धन्य है, उनका रोम रोम धन्य हैं.. वे ऐसे महापुरुष है जो केवल नाम से ही नहीं वरन जिनका स्वाभाव ही स्वभावतः 'कृपा कृपा कृपा' का ही है। ऐसे सद्गुरु की शरण जाकर हम सबको अपनी बिगड़ी संवार लेनी चाहिए। अनंतानत जन्मों से भटकते हम पापी जीवात्माएं आनंद के लिए भटक रहीं हैं, आज उसी आनंद को पाने का एक रास्ता, जो सद्गुरु देव की कृपा से अति ही सरल जान पड़ता हैं, अगर कोई गहराई से सोचे, इन महापुरुष की दया से सहज में ही मिल रहा है, तो क्यूँ न इस पापी और ढीठ मन को एक बार उनके चरणों में झुका दें और और उनका खजाना पा लें, जो अनंत हैं।

इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु आज से साढ़े चार वर्ष पूर्व हमने श्री युगलसरकार की कृपा से हमारे पूजनीय जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज के दिव्य ज्ञान को social media पर प्रचारित-प्रसारित करने का संकल्प लिया था। जो आज हरि-गुरु कृपा से बहुत ही सुचारु रूप से चल पड़ा है। हजारों मित्रों को रोज यहाँ से आध्यात्मिक लाभ मिल रहा है।
आप सभी साधकों से विनती है कि इन सभी weblinks में जो की श्री महाराजजी की कृपा से ही प्रारम्भ हुए हैं ,इसमें अधिक से अधिक सत्संगी बहन-भाइयों को जोड़ते रहें। जिससे सभी को श्री महाराजजी के दिव्य तत्वज्ञान का लाभ मिल सके। हमारा एकमात्र उद्देश्य श्री महाराजजी द्वारा प्रगटित दिव्य ज्ञान को जन-जन तक हर घर तक पहुंचाने का है। सभी श्री महाराजजी को जानें...समझे और उनके मार्गदर्शन उनकी बताई गयी साधना पद्धति से अपना अमूल्य मानव देह सफल बनाये।
अगर आपको इन सभी weblinks से जुड़ने पर वास्तविक लाभ होता है तो मन ही मन श्री महाराजजी का ही आभार व्यक्त करें की उनकी कृपा से उनका अमूल्य तत्वज्ञान आपको यहाँ social media पर एक click में उपलब्ध हो रहा है।
इन ग्रुप्स/pages से जुडने से अगर आपको वास्तविक लाभ हुआ है तो वो अनुभव भी आप यहाँ share कर सकते हैं जिससे अन्य साधकों को भी लाभ मिलें।
आप सभी के सुझाव इन weblinks को और बेहतर बनाने के लिए भी आमंत्रित हैं।
**************जय-जय श्री राधे*************
हरि-गुरु को मन में जितनी बार लाओगे उतनी ही मन की गंदगी शुद्ध होगी,और अगर गंदी बातें लाओगे तो मन और गंदा होगा।
......श्री महाराजजी।

कीर्तन में बैठते नहीं हैं और सोचते हैं भगवतप्राप्ति कर लेंगे।
........श्री महाराजजी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...