This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Friday, March 11, 2016
लोक हानि में संसारी वस्तुओं के अभाव में चिन्ता मत करो। कभी - कभी भगवान् लोक हानि जान बुझकर देते हैं।
भगवान् कहते हैं कि मैं जिस पर अनुग्रह करना चाहता हूँ , उसे ऐश्वर्यभ्रष्ट कर देता हूँ। वास्तव में तो संसार का जितना भी अभाव है वो भगवत कृपा ही है। भगवान् को यह चिन्ता होती है कि हमारा भक्त कहीं उसमें उलझ न जाये।
------सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका),जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
भगवान् कहते हैं कि मैं जिस पर अनुग्रह करना चाहता हूँ , उसे ऐश्वर्यभ्रष्ट कर देता हूँ। वास्तव में तो संसार का जितना भी अभाव है वो भगवत कृपा ही है। भगवान् को यह चिन्ता होती है कि हमारा भक्त कहीं उसमें उलझ न जाये।
------सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका),जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
हे जगद्गुरुत्तम कृपालु महाप्रभु!
आपने अपने अथक प्रयासों से अध्यात्म जगत में व्याप्त मत-मतान्तरों का सुन्दर समन्वय कर समस्त विरोधाभासों को दूर किया है। सिद्धांत पक्ष को इतना सरल, सारगर्भित एवं सर्वसुगम बना दिया है कि आपको सुनने के बाद कोई भी व्यक्ति अपने आप को वेद-निष्णात से कम नहीं समझता। फिर उस व्यक्ति के लिए उलझन नाम की कोई चीज़ ही नहीं रह जाती है।
आप न केवल सैद्धांतिक पक्ष को जनमानस में पक्का करते है अपितु स्वयं अपने निर्देशन में व्यावहारिक साधना भी कराते है।आप जीव मात्र के कल्याण हेतु निशि-दिन प्रयत्नरत है।
आप भक्तियोगरसावतार है अतः हम सबके लिए साधन एवं साध्य भी आप ही है।
आपने इस धराधाम पर अवतार लेकर अपना नाम, रूप, गुण, लीला, धाम, जन आदि देकर हम अधमों पर 'गुरु' कृपा की है जिसका अवलंब लेकर हम अपने परम चरम लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है। सम्पूर्ण विश्व आपकी कृपाओं का सदैव ऋणी रहेगा।
आपने अपने अथक प्रयासों से अध्यात्म जगत में व्याप्त मत-मतान्तरों का सुन्दर समन्वय कर समस्त विरोधाभासों को दूर किया है। सिद्धांत पक्ष को इतना सरल, सारगर्भित एवं सर्वसुगम बना दिया है कि आपको सुनने के बाद कोई भी व्यक्ति अपने आप को वेद-निष्णात से कम नहीं समझता। फिर उस व्यक्ति के लिए उलझन नाम की कोई चीज़ ही नहीं रह जाती है।
आप न केवल सैद्धांतिक पक्ष को जनमानस में पक्का करते है अपितु स्वयं अपने निर्देशन में व्यावहारिक साधना भी कराते है।आप जीव मात्र के कल्याण हेतु निशि-दिन प्रयत्नरत है।
आप भक्तियोगरसावतार है अतः हम सबके लिए साधन एवं साध्य भी आप ही है।
आपने इस धराधाम पर अवतार लेकर अपना नाम, रूप, गुण, लीला, धाम, जन आदि देकर हम अधमों पर 'गुरु' कृपा की है जिसका अवलंब लेकर हम अपने परम चरम लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है। सम्पूर्ण विश्व आपकी कृपाओं का सदैव ऋणी रहेगा।
बोलिये "अलबेली सरकार की जय।"
जय श्री राधे।
जय श्री राधे।
Wednesday, March 2, 2016
जब
तक माया के अधीन हो तब तक क्यों सोचते हो कि मैं प्रशंसा के योग्य हूँ ।
जब तक तुम शरणागत नहीं हुए तब तक तुम्हे अहंकार किस बात का ? किसी भी जीव
का वास्तविक स्वरूप श्री कृष्ण दासत्व ही है । श्री कृष्ण के दास बन जाओ
फिर खूब अहंकार करो । हम छूट देते हैं ।लेकिन उस समय तुम अहंकार कर ही नहीं
सकते। भगवत्प्राप्ति से पहले रहता है अहंकार। अतः सदा सावधान रहो।
---------जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु।
---------जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु।
कोई
महापुरुष हो , चाहे राक्षस हो। अपने मन में दूसरे के प्रति हमेशा अच्छी
भावना होनी चाहिये। जिससे अच्छे विचार अंतःकरण में आवें। वो जो है, वो तो
रहेगा ही। वो राक्षस होगा, तो राक्षस रहेगा। महापुरुष होगा तो महापुरुष
रहेगा। हम अपने अंदर अगर दुर्भावना लाते हैं तो हमने तो अपना अंतःकरण
बिगाड़ लिया। अब भगवान् जो थोड़ा पैर रखे आने के लिए, एबाउट टर्न चल दिये।
वो कहते हैं - क्योंकि तुम तो औरों को बुलाते हो , इसलिये मैं नहीं रहता
ऐसे घर में।
!! जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज !!
!! जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज !!
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






