Thursday, April 7, 2016

गुरु वन्दना......!!!

हे हमारे जीवन धन! हमारे प्राण! हमारे पथ प्रदर्शक ! हमारे इस विश्वास को दृढ़ कर दो कि तुम सदा सर्वत्र हमारे साथ हो,हमारे साथ ही चल रहे हो,खा रहे हो,बोल रहे हो,हँस रहे हो,खेल रहे हो,हर क्रिया में तुम्हारी ही उपस्थिती का अनुभव हो। तुम्हारा नाम लेकर तुम्हें पुकारें,और तुम सामने आ जाओ। नाम में नामी विध्यमान है इस सिद्धान्त को हमारे मस्तिक्ष में बारंबार भरने वाले! अब इसे क्रियात्मक रूप में हमें अनुभव करवा दो।
हे दयानिधान! नाम में प्रकट होकर कृपा करने वाले कृपालु!
तुमको कोटि-कोटी प्रणाम।


-------सुश्री श्रीधरी दीदी (जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की प्रचारिका)।
गुरु हमारे अत्यंत निकट है,दिन-रात हमारे साथ रहते हैं।यह विश्वास दृढ़ करो,ध्यान रहे की उनका वियोग कभी होता ही नहीं है।

--------सुश्री श्रीधरी दीदी (जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की प्रचारिका)।
जो ये हम सोचते हैं कि कोई नहीं जानता,ये सबसे बड़ा पाप का मूल है।

.....श्री महाराजजी।
God is merciful. He knows all the souls have various levels of consciousness and that they are indulging in the material world. He reveals such a path that can help people of all natures; those who are in material consciousness, those who are in yogic or psychic consciousness and those who are in God consciousness. All of these can be helped if they follow the right path. God has revealed His knowledge in the Vedas, the Gita and Bhagwatam, telling how to reach Him. Wherever you are whatever the state of your mind is, it doesn't matter. If you trust in our scriptures, they shall lead you to Him.
.......JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.

Sunday, April 3, 2016

संसार में न सुख है, न दुःख ही है यह ज्ञान दृढ कर लेना चाहिए । संसार में सुख मानने से ही उसके अभाव में दुःख मिलता है ।

-------सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका),जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
हमारो धन राधा राधा राधा राधा राधा, हमारो धन राधा राधा राधा।

प्राणधन राधा राधा राधा। जीवन धन राधा राधा राधा।

---- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
हमें तो एक तिहारी आस ।

O Shyam Sundar ! All my hopes are confined to you alone.

......SHRI MAHARAJ JI.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...