Sunday, May 15, 2016

प्रेम तत्व की सार मादन स्वरुपा रासेश्वरी श्री राधारानी ही सर्वश्रेष्ठ तत्व है । श्रीकृष्ण जिसकी आराधना करें, उस तत्व का नाम राधा तत्व है । जिसकी चरण-धूलि ब्रह्म श्री कृष्ण अपने सिर पर धारण करते हैं, जिसके अंक में लेटे हुये श्री कृष्ण गोलोक को भूल जाते हैं, ऐसी सत्ता का नाम है-'राधा', जिसकी अंश है- ब्रह्माणी, शिवानी, कमला आदि॥
----------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ।
ईश्वरीय क्षेत्र में मन का ही महत्त्व है। केवल शारीरिक रूप से सत्संग करने का विशेष लाभ नहीं है। मन से श्रद्धायुक्त हो कर सत्संग जीव को ज्ञान, वैराग्य, भक्ति सब कुछ दिला देगा।
......श्री कृपालु महाप्रभु ।

श्यामसुन्दर पर तुम्हारा इतना अधिकार है जितना अपने आप पर भी नहीं है। वे तुमसे इतना प्यार करते है जितना तुम अपने आप से भी नहीं करते।
.........जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।
वे हमारी रक्षा करते हैं, वे हमारी रक्षा कर रहे हैं, वे आगे भी हमारी रक्षा करेंगे, इस पर विश्वास कर लो।
........श्री महाराजजी।
सारा संसार मायाजनित अज्ञान के द्वारा अन्धा हो रहा है परन्तु अपने को कोई भी अज्ञानी नहीं समझता सभी ज्ञानी समझते हैं।
-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

जानकी नवमी की हार्दिक शुभकमनाएँ।
सीता मैया की जय हो। सियावर रामचन्द्र की जय हो।

Wednesday, May 4, 2016

जग राग छूटे नहीं, कृपा करु राधे।
माया ने सताया अति, कृपा करु राधे ।।


O Radhey! Please destroy my worldly attachments by showering Your Divine grace upon me. Your Maya has troubled me extensively; please bless me with Your grace.

........SHRI MAHARAJJI.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...