Friday, July 8, 2016

तमाम धर्म भ्रम में डालने वाले हैं और हमको तो भ्रम मिटाना है ? भ्रम माने माया, जिसके कारण आनंद प्राप्ति से वंचित हैं। तो केवल पुण्डरीकाक्ष श्रीकृष्ण में मन का लगाव कर दें। सरेंडर(surrender) कर दें, शरणागत कर दे, उनकी भक्ति करे, बस।
इसके अतिरिक्त कोई धर्म ही नहीं होता। धर्म माने धारण करने योग्य। बस श्रीकृष्ण को धारण करो, यही धर्म है क्योंकि हम श्रीकृष्ण के दास हैं।
जिसने श्रीकृष्ण की भक्ति की, वह समस्त धर्मों को कर चुका। सारे धर्म उसको नमस्कार करेंगे। उसे कुछ नहीं करना।

------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
Time is valuable so it should not be wasted. The past is over and the future is uncertain. Only the present is in our hands. Use it for the attainment of Shree Krishna's love before it is too late.
......SHRI MAHARAJJI.

सत्य,अहिंसा आदि सदाचार का आचरण अन्त:करण की शुद्धि के बिना असंभव है।

----- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

जय जय भानुनंदिनी जय जय नँदनंदन।
जय जय ब्रज गोपीजन,जय जय वृंदावन।
------- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
समस्त कर्मों से श्रेष्ठ है हरि-हरि भक्त का संग,क्योंकि इसका फल है दिव्य चिन्मय गोलोक धाम की प्राप्ति।
----- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

श्रीकृष्ण भक्ति के बिना अन्त:करण शुद्धि होना असंभव है। श्रीकृष्ण नवधाभक्ति ही साधना एवं सिद्धि है।
----- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

गुरु के दिये हुये ज्ञान को सदा पुनरावृति (मनन ) के द्वारा पक्का करते रहना चाहिये अन्यथा मायाबद्ध होने के कारण अनादिकालीन अज्ञान उस ज्ञान पर हावी होकर उसे भुला देता है ।
.......सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका),जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...