Thursday, October 6, 2016

One should be extremely cautious about avoiding all kinds of kusang. Factually, anything which impedes one’s devotion to God is kusang.
.....SHRI MAHARAJJI.
ओरे जादूगर श्याम तू बड़ोई जादूगर।
तेरा रॉम रॉम जादू की पिटारी नटवर।
तूने लूटे जादू करि बड़ों बड़ों के भी घर।
तूने लूटे परिकर विधि हरि हर घर।।

------ जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

Tuesday, September 13, 2016

मोरी भोरी सी किशोरी,तनु गोरी,रसबोरी,चोरी चोरी चित चोरी चितचोरहुँ की।

रसिक रँगीली, गुन गर्वीली,छैल छबीली श्री राधे।

------ जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
गुरु आवश्यक है , गुरु किसे कहते हैं ?
जिसमें श्रीकृष्ण प्रेम हो , केवल लैक्चर दे , उससे काम नहीं चलेगा। भगवान् की प्राप्ति में केवल प्रेम देखा जायेगा।
रामही केवल प्रेम पियारा।
आप लोग जब पैदा हुये तो बोल नहीं सकते थे , माँ को पहचान भी नहीं सकते थे। भूख लगी - रो दिये। दर्द हुआ - रो दिये। बस ! बस वहीँ फिर पहुँचना होगा आपको एक दिन। इस जन्म में पहुँचो चाहें हजारों जन्मों में दुःख भोगने के पश्चात्। ये कृपालु का वाक्य आपको सदा याद रखना है - फिर भोले बालक बनना है , { भोला बालक }
गुरु के आदेश में जरा भी बुद्धि न लगाओ ; जैसे वाल्मीकि मरा - मरा कहता रहा , उसने न तो ये पूछा कि मरा - मरा कहने से क्या होगा ? और न ये पूछा आप कब लौटकर आयेंगे ? जो आज्ञा है उसका पालन करना है।
............जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।
हम दाेषदृष्टि से देखना आरम्भ करेंगे तब ताे संसार मे एक भी मनुष्य दाेष से रहित दृष्टिगाेचर नहीं हाेगा। संसार ही दाेष-गुण के संम्मिश्रण से बना है।
--------जगद्गुरु श्री कृपाल जी महाराज।
ये मन दुश्मन है, इससे सदा सावधान रहो। मन को सदा हरि-गुरु के चिंतन में लगाये रहो तो मन शुद्ध होगा। भगवान कहते हैं सदा सर्वत्र मेरा स्मरण करते रहो ताकि मरते समय मेरा स्मरण हो और तुम्हें मेरा लोक मिले,मेरी सेवा मिले।
------ जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
साधक को अपने कल्याण हेतु केवल हरि-गुरु की कृपा पर ही निर्भर होना चाहिये तथा शेष संसार के प्रति उदासीन भाव रखना चाहिये।
--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज I

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...