Saturday, November 19, 2016

Philosophy of Divine Love by Shri Maharaj Ji has been presented by Badi Didi in The Speaking Tree part of Times of India (TOI) - 13 November 2016.
बहुतों को शंका है की भगवान और गुरु हमसे कितना प्यार करते हैं या कितना कृपा करते हैं ? तो इसका सीधा और सरल उतर है कि जो जीव जितनी मात्रा में जितना प्यार (भक्ति) करेगा, उससे भगवान और गुरु उतना ही प्यार करेंगे उससे अधिक भी नहीं या उससे कम भी नहीं । अब आप लोग सोचो आपको कितना चाहिए । आपको यदि १०% चाहिये तो १०% कर लो यदि ५०% चाहिये तो ५०% कर लो यदि हाँ १००% चाहिये पूरा कर लो । इसलिये प्यार करोगे तो प्यार मिलेगा यदि एक्टिंग करोगे तो वो भी महा एक्टिंग करेंगे । इसलिये छल, कपट छोड़ कर निस्वार्थ भाव से तुरंत जन्मे हुये बच्चे की तरह रो कर पुकारो ओर प्यार (भक्ति) करो ।
.......जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
कोई मन से 'कृपालु' हो, ये तन से भी 'कृपालु' हैं ।

लुटाओ खुद को लूटो इनको, ये भोले दयालु हैं ।।


वे हमारे हो चुके,अब मैं जैसा भी हूँ उनका हूँ , का प्रश्न ही नहीं है। क्योंकि जब उनका हूँ तो वैसा ही हूँ ,जैसा वे चाहते हैं। अर्थात उन्हें पतित अकिंचन ही प्रिय हैं और मैं वह हूँ ही। फिर अब क्या संशय।
---- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
साधक को तो अपनी साधना, विशेषकर अनुभव आदि , अत्यन्त ही गुप्त रखना चाहिए। केवल अपने सद्गुरु से ही कहना चाहिये। अपने आप भी उन अनुभवों का चिंतन करना चाहिए, किन्तु वहाँ भी सावधानी यह रखनी चाहिये कि यह सब अनुभव महापुरुष की कृपा से ही प्राप्त हुआ है, मेरी क्या सामर्थ्य है।
------ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
Surrender and Grace go together. As your surrender towards God and Guru increases, Their Grace increases.
"Shri Maharaj Ji says:
The consequences of the actions performed in the previous birth are called "fate" in the succeeding birth. Thus, the actions we perform in the present will be known by the name of "fate" in the future. Therefore, we should not be negligent and undisciplined in the present."

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...