This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Friday, December 2, 2016
प्रिय मेम्बर्स.....! जय श्री राधे।
आप सभी मित्रों का जो प्यार एवं आशीर्वाद हमको प्राप्त हो रहा है उसके लिए आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूँ। आप लोग जिस तरह से इतनी भारी संख्या में श्री महाराजजी की हर पोस्ट को लाइक कर रहे हैं,comments लिख रहे हैं ,उसको देखके मन गदगद हो जाता है,और लगता है हम लोग और मेहनत करें जिससे श्री गुरुदेव का ये दिव्य ज्ञान और तेजी से दसों दिशाओं में फैले।
मेरे प्रति तो आप सभी का प्यार शुरू से विशेष ही रहा है। आपका प्यार ही मेरी ताकत है। अगर आप सभी मेरा साथ नहीं देते तो शायद मैं भी टूट जाता। मैं आप सभी के प्यार,आशीर्वाद ,सहयोग का सदा ही ऋणी रहूँगा,क्योंकि आप ने जो प्यार दिया है वो अनमोल है। उसको शब्दों में बयान करना असंभव है।
कितना बड़ा एवं शुद्ध हृदय है आप लोगों का,कितना ज्यादा प्यार आप श्री महाराजजी से करते हैं जो मुझ जैसे तुच्छ जीव पर भी इतना प्यार बरसा रहे हैं।
आजके युग में नहीं तो भक्ति के अलावा इंसान के पास हर चीज के लिए समय है। नक़ली मिथ्या जीवन जीने वाले ये लोग internet तक का गलत उपयोग कर रहे हैं,बेचारे अशांत हैं,अतृप्त हैं,संसार को रिझा रहे हैं, इन मूर्खों के पास भगवान के लिए समय ही नहीं है। जो संसार दिन रात जूते चप्पल मार रहा है उसीको ख़ुश करने में लगे हुए हैं। आश्चर्य है कि दिन रात इतने जूते चप्पल खाने के बाद भी इन का रूझान भगवान में नहीं होता, ये अच्छा बनना नहीं चाहते,अच्छा कहलवाना चाहते हैं, अरे! संसार तो अच्छे को कभी अच्छा नहीं कह सकता तुमको क्या अच्छा कहेगा। और एक तरफ आप लोग हैं जो इतना समय social media पर श्री महाराजजी के लिए निकाल रहे हैं,आप सभी विशेष बधाई के पात्र हैं। हमारे द्वारा संचालित सभी ग्रुप्स/pages को आपका जो अनवरत सहयोग मिल रहा है उसके लिए हम आपके सदा आभारी रहेंगे।
कुछ लोगों को आपके इस प्यार एवं सहयोग से मेरे से allergy भी हो रही है। वोलोग किसी भी तरह ये सहन नहीं कर पाते कि सारा प्यार 'शरद भैया' को ही क्यों मिलता है,तो उनको मैं बता दूँ कि आप सभी भी निरंतर मेहनत कीजिये, एक दिन में आप 'शरद' नहीं बन जायेंगे। आज से 6 साल पहले श्री महाराजजी का नाम भी social media पर कोई नहीं जानता था,थोड़ा बहुत प्रचार था वो भी बिलकुल अव्यवस्थित रूप में ,मेरे इस mission के पीछे मेरी एवं टीम की 6 साल की मेहनत है और आप लोग एक ही दिन में सब कुछ प्राप्त कर लेना चाहते हैं। आप लोगों को तो बल्कि अच्छा खासा प्लैटफ़ार्म हमने ready करके दे दिया है ,जो परेशानियाँ हमने face की वो आपको अब नहीं करनी पड़ रही है, इसलिए धैर्य रखिये,ईर्ष्या को त्यागिये, ये भी आप में से अधिकांश जानते ही हैं,भले ही मानते न हो कि इन्ही ग्रुप्स/pages से आपको श्री महाराजजी के social media पर प्रचार की प्रेरणा मिली है,जब आप सभी यहाँ की सारी ही नकल करते हैं तो मेहनत में भी कृपया नकल कीजिये। आपको भी प्यार मिलने लगेगा।
आने वाले वर्षों में तो हमारे परम-पूज्य श्री महाराजजी द्वारा प्रगटित ये दिव्य ज्ञान वैसे ही घर-घर में जाना-माना जायेगा। युगों-युगों तक सज्जन पुरुषों का,अधिकारी जीवों का मार्गदर्शन करता रहेगा।
इसलिए सभी मित्रों से विनती है कि अधिक से अधिक संख्या में हमसे जुड़िये,और अपने मित्रों को, रिश्तेदारों को श्री महाराजजी के बारे में बताइये,जैसा लाभ आप सभी को मिल रहा है उनतक भी अवश्य ये लाभ पहुँचना चाहिए। कोई भी इस दिव्य ज्ञान से वंचित न रह जाये। सभी खूब प्रचार-प्रसार कीजिये।
पुन: आप सभी को आपके प्यार,सहयोग,आशीर्वाद के लिए कोटि-कोटि हार्दिक नमन। आपका ये प्यार ही मेरी ताकत है। आपकी सेवा हमेशा की भाँति जारी रहेगी,बल्कि ओर ज़ोर-शोर से हम हमारे प्राण प्रिय गुरुदेव 'जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज' की ये दिव्य वाणी,ये philosophy आप तक पहुंचाते रहेंगे। नीचे फ़ोटो मैं मेरे द्वारा श्री महाराजजी के प्रचारार्थ संचालित सभी web links दिये जा रहे हैं,इनमें आप लोगों को जोड़िये,यही करबद्ध निवेदन है। सभी इस क्रांति में अपना-अपना सहयोग प्रदान करें,यही आपके इस भाई की आपके चरणों में विनती हैं,आशा है आप निराश नहीं करेंगे।
सभी मेम्बर्स को पुन:कोटि-कोटि नमन एवं हार्दिक आभार।
जय श्री राधे।
आप सभी मित्रों का जो प्यार एवं आशीर्वाद हमको प्राप्त हो रहा है उसके लिए आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूँ। आप लोग जिस तरह से इतनी भारी संख्या में श्री महाराजजी की हर पोस्ट को लाइक कर रहे हैं,comments लिख रहे हैं ,उसको देखके मन गदगद हो जाता है,और लगता है हम लोग और मेहनत करें जिससे श्री गुरुदेव का ये दिव्य ज्ञान और तेजी से दसों दिशाओं में फैले।
मेरे प्रति तो आप सभी का प्यार शुरू से विशेष ही रहा है। आपका प्यार ही मेरी ताकत है। अगर आप सभी मेरा साथ नहीं देते तो शायद मैं भी टूट जाता। मैं आप सभी के प्यार,आशीर्वाद ,सहयोग का सदा ही ऋणी रहूँगा,क्योंकि आप ने जो प्यार दिया है वो अनमोल है। उसको शब्दों में बयान करना असंभव है।
कितना बड़ा एवं शुद्ध हृदय है आप लोगों का,कितना ज्यादा प्यार आप श्री महाराजजी से करते हैं जो मुझ जैसे तुच्छ जीव पर भी इतना प्यार बरसा रहे हैं।
आजके युग में नहीं तो भक्ति के अलावा इंसान के पास हर चीज के लिए समय है। नक़ली मिथ्या जीवन जीने वाले ये लोग internet तक का गलत उपयोग कर रहे हैं,बेचारे अशांत हैं,अतृप्त हैं,संसार को रिझा रहे हैं, इन मूर्खों के पास भगवान के लिए समय ही नहीं है। जो संसार दिन रात जूते चप्पल मार रहा है उसीको ख़ुश करने में लगे हुए हैं। आश्चर्य है कि दिन रात इतने जूते चप्पल खाने के बाद भी इन का रूझान भगवान में नहीं होता, ये अच्छा बनना नहीं चाहते,अच्छा कहलवाना चाहते हैं, अरे! संसार तो अच्छे को कभी अच्छा नहीं कह सकता तुमको क्या अच्छा कहेगा। और एक तरफ आप लोग हैं जो इतना समय social media पर श्री महाराजजी के लिए निकाल रहे हैं,आप सभी विशेष बधाई के पात्र हैं। हमारे द्वारा संचालित सभी ग्रुप्स/pages को आपका जो अनवरत सहयोग मिल रहा है उसके लिए हम आपके सदा आभारी रहेंगे।
कुछ लोगों को आपके इस प्यार एवं सहयोग से मेरे से allergy भी हो रही है। वोलोग किसी भी तरह ये सहन नहीं कर पाते कि सारा प्यार 'शरद भैया' को ही क्यों मिलता है,तो उनको मैं बता दूँ कि आप सभी भी निरंतर मेहनत कीजिये, एक दिन में आप 'शरद' नहीं बन जायेंगे। आज से 6 साल पहले श्री महाराजजी का नाम भी social media पर कोई नहीं जानता था,थोड़ा बहुत प्रचार था वो भी बिलकुल अव्यवस्थित रूप में ,मेरे इस mission के पीछे मेरी एवं टीम की 6 साल की मेहनत है और आप लोग एक ही दिन में सब कुछ प्राप्त कर लेना चाहते हैं। आप लोगों को तो बल्कि अच्छा खासा प्लैटफ़ार्म हमने ready करके दे दिया है ,जो परेशानियाँ हमने face की वो आपको अब नहीं करनी पड़ रही है, इसलिए धैर्य रखिये,ईर्ष्या को त्यागिये, ये भी आप में से अधिकांश जानते ही हैं,भले ही मानते न हो कि इन्ही ग्रुप्स/pages से आपको श्री महाराजजी के social media पर प्रचार की प्रेरणा मिली है,जब आप सभी यहाँ की सारी ही नकल करते हैं तो मेहनत में भी कृपया नकल कीजिये। आपको भी प्यार मिलने लगेगा।
आने वाले वर्षों में तो हमारे परम-पूज्य श्री महाराजजी द्वारा प्रगटित ये दिव्य ज्ञान वैसे ही घर-घर में जाना-माना जायेगा। युगों-युगों तक सज्जन पुरुषों का,अधिकारी जीवों का मार्गदर्शन करता रहेगा।
इसलिए सभी मित्रों से विनती है कि अधिक से अधिक संख्या में हमसे जुड़िये,और अपने मित्रों को, रिश्तेदारों को श्री महाराजजी के बारे में बताइये,जैसा लाभ आप सभी को मिल रहा है उनतक भी अवश्य ये लाभ पहुँचना चाहिए। कोई भी इस दिव्य ज्ञान से वंचित न रह जाये। सभी खूब प्रचार-प्रसार कीजिये।
पुन: आप सभी को आपके प्यार,सहयोग,आशीर्वाद के लिए कोटि-कोटि हार्दिक नमन। आपका ये प्यार ही मेरी ताकत है। आपकी सेवा हमेशा की भाँति जारी रहेगी,बल्कि ओर ज़ोर-शोर से हम हमारे प्राण प्रिय गुरुदेव 'जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज' की ये दिव्य वाणी,ये philosophy आप तक पहुंचाते रहेंगे। नीचे फ़ोटो मैं मेरे द्वारा श्री महाराजजी के प्रचारार्थ संचालित सभी web links दिये जा रहे हैं,इनमें आप लोगों को जोड़िये,यही करबद्ध निवेदन है। सभी इस क्रांति में अपना-अपना सहयोग प्रदान करें,यही आपके इस भाई की आपके चरणों में विनती हैं,आशा है आप निराश नहीं करेंगे।
सभी मेम्बर्स को पुन:कोटि-कोटि नमन एवं हार्दिक आभार।
जय श्री राधे।
मुक्ति
एवं बंधन में मध्यस्थ कारण केवल मन ही है । अतएव हमें मन को ही ईश्वर के
शरणागत करना है । मन के शरणागत होने पर सबकी शरणागति स्वयमेव हो जायेगी ।
हम लोग शारीरिक क्रियादिकों से तो ईश्वर की शरणागति सदा ही करते हैं किन्तु
मन की आसक्ति जगत में ही रखते हैं अतएव मन की आसक्ति के अनुसार जगत की ही
प्राप्ति होती है । यह अटल सिद्धांत है कि मन की आसक्ति जहाँ होगी , बस उसी
तत्व की प्राप्ति होगी । यदि हम शारीरिक कर्म अन्य करें एवं मानसिक आसक्ति
अन्यत्र हो तो बस मन की आसक्ति का ही फल मिलेगा
। अर्थात यदि शरीरेंद्रियों से हम शुभ या अशुभ कर्म करें एवं मन से कुछ भी
न करें , केवल ईश्वर- शरणागत ही रहें तो कर्म का फल न मिलेगा , केवल
ईश्वरीय लाभ ही मिलेगा । अतएव मन की शरणागति ही वास्तविक शरणागति है । जैसे
पैरों को बांधकर मार्चिंग नहीं हो सकती , मुख बंद करके स्पीच नही हो सकती ,
वैसे ही मन को अन्यत्र आसक्त करके ईश्वरोपासना भी नही हो सकती । मन की
आसक्ति ही ईश्वरीय क्षेत्र में 'उपासना' कहलाती है एवं जगत क्षेत्र में
'आसक्ति' कहलाती है ।
.......जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
ऊधो !, कहियो श्याम सुजान |
पाण्डु रोग जनु भयो तुमहिं बिनु, जड़ – जंगम पियरान |
बछरन पियत न दूध सुरभि – थन, तृण न चरति गैयान |
लता गुल्म औषधि सब सूखे, यमुना जलहुँ सुखान |
गोपिन, गोपन की का कहिये, जिनके तुम हो प्रान |
वे ‘कृपालु’ भल भूलि जाहिँ मोहिँ, हौं न भूलि सक कान्ह ||
पाण्डु रोग जनु भयो तुमहिं बिनु, जड़ – जंगम पियरान |
बछरन पियत न दूध सुरभि – थन, तृण न चरति गैयान |
लता गुल्म औषधि सब सूखे, यमुना जलहुँ सुखान |
गोपिन, गोपन की का कहिये, जिनके तुम हो प्रान |
वे ‘कृपालु’ भल भूलि जाहिँ मोहिँ, हौं न भूलि सक कान्ह ||
भावार्थ – ब्रजांगनाएँ उद्धव के द्वारा श्यामसुन्दर को संदेश भेजती हुई
कहती हैं कि हे उद्धव ! उन श्यामसुन्दर से कह देना कि तुम्हारे वियोग में
ब्रज के समस्त जड़ चेतन जीवों को पाण्डुरोग सा हो गया है, सब के सब पीले पड़
गये हैं | बछड़े गायों का दूध नहीं पीते, गायें घास नहीं चरतीं, लता गुल्म
औषधि सब सूख गयीं और यमुना जल भी सूख गया फिर जिन गोपियों एवं ग्वालों के
तुम प्राण हो, उनकी दशा तो बिना कहे ही अच्छा है | ‘श्री कृपालु जी’ के
शब्दों में वे हम लोगों को भले ही भूल जायँ किन्तु हम लोग उन्हें स्वप्न
में भी नहीं भूल सकते |
( प्रेम रस मदिरा विरह - माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति
( प्रेम रस मदिरा विरह - माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति
हम कह देते हैं— महाराज जी!
वो मन नहीं लगता।महाराज जी! वो, हम साधना करते हैं,तो मन संसार में जाता है।अरे! अनंत जन्म संसार में ले गये हो।ले गये हो, तो वो जाता है,
क्या करे बेचारा? अरे, भई! मन का काम जाने का है,तुम भगवान् की ओर ले जाओ, उधर जायेगा।जब चप्पल-जूता खाने पर भी वो बार-बार जाने को तैयार है, तुम्हारी आज्ञा से,तो, जो वो आनंद सिन्धु है,उसके पास जाने को क्यों मना करेगा?
उसको मना करने का अधिकार ही नहीं है।
वो तो, जो बुद्धि कहेगी, मन वो करेगा।और बुद्धि क्या कहेगी,ये डिसीजन महापुरुषों की शरण होकर के उनसे लो।शास्त्र-वेद और गुरु यही डॉक्टर हैं,
इनके द्वारा तत्त्वज्ञान प्राप्त करके उसी प्रकार मन को गवर्न करो और एक सेकंड में गवर्न नहीं कर सकोगे हमेशा के लिये।
वो मन नहीं लगता।महाराज जी! वो, हम साधना करते हैं,तो मन संसार में जाता है।अरे! अनंत जन्म संसार में ले गये हो।ले गये हो, तो वो जाता है,
क्या करे बेचारा? अरे, भई! मन का काम जाने का है,तुम भगवान् की ओर ले जाओ, उधर जायेगा।जब चप्पल-जूता खाने पर भी वो बार-बार जाने को तैयार है, तुम्हारी आज्ञा से,तो, जो वो आनंद सिन्धु है,उसके पास जाने को क्यों मना करेगा?
उसको मना करने का अधिकार ही नहीं है।
वो तो, जो बुद्धि कहेगी, मन वो करेगा।और बुद्धि क्या कहेगी,ये डिसीजन महापुरुषों की शरण होकर के उनसे लो।शास्त्र-वेद और गुरु यही डॉक्टर हैं,
इनके द्वारा तत्त्वज्ञान प्राप्त करके उसी प्रकार मन को गवर्न करो और एक सेकंड में गवर्न नहीं कर सकोगे हमेशा के लिये।
अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते॥
अभ्यासवैराग्याभ्यां तन्निरोधः।
----- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
अभ्यासवैराग्याभ्यां तन्निरोधः।
----- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
हमारे देश में माइक से मन्त्र बोल देते हैं,जितने बैठे हैं सब चेले हो गये।और सबने मान लिया, हाँ, गुरूजी!हम चेले हो गये हैं आपके।
इतना अँधा है जगत,वो न कुछ पढ़े, न समझे,न शास्त्र-वेद को समझाने वाले हमारी दुनिया में हैं,क्योंकि समझाने वाले जो समझते भी हैं,वो अगर सही-सही बात समझा दें,तो उनका बिजनेस खराब जायेगा।
-----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
इतना अँधा है जगत,वो न कुछ पढ़े, न समझे,न शास्त्र-वेद को समझाने वाले हमारी दुनिया में हैं,क्योंकि समझाने वाले जो समझते भी हैं,वो अगर सही-सही बात समझा दें,तो उनका बिजनेस खराब जायेगा।
-----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
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