This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Friday, December 2, 2016
राग
और द्वेष दो ही एरिया हैं सारे संसार में,बाँधे हुए है हम सबको। तो राग
करना है तो बस हरि से और द्वेष करना है तो काम से क्रोध से लोभ से ईर्ष्या
से द्वेष से करो। ये आने न पावें, हमारे हृदय को गंदा न करने पांवे। हमारी
वह पूँजी है। हम जो कमाते हैं ,एक बार भी जो भगवान् का नाम लेते हैं,ये
हमारी कमाई है। इसमें गड़बड़ न करे कोई।
---जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
---जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
Tuesday, November 29, 2016
तुम
बुद्धि को स्थिर करो तथा यह सोचा करो कि मैं शरीर नहीं आत्मा हूँ और वह भी
अपने प्रेमास्पद की ही हूँ , उनके लिए ही हूँ। सदा यही सोचो कि मैं संसार
की नहीं , मैं तो गोलोक वाले की हूँ। मुझे संसार अपने अन्डर में नहीं कर
सकता। मैं मायिक धोखों के चक्कर में नहीं आऊँगी। सदा अपने प्रेमास्पद की
कृपा पर बलिहार जाओ।
!!!!! जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाप्रभु !!!!!
!!!!! जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाप्रभु !!!!!
Friday, November 25, 2016
मानव
देह तो कभी-कभी मिलता है। लाखों वर्षों के बाद, बाकी योनियाँ मिला करती
हैं। कुत्ते बने, गधे बने, बिल्ली बने, मच्छर बने, दुःख भोगे मर गये, फिर
दुःख भोगे फिर मर गये। लेकिन कर्म करने का अधिकार और योनियों में नहीं है,
स्वर्ग में भी नहीं है। - वहाँ भी भोग है, जैसे कुत्ता-बिल्ली ये भोग योनि
है। ऐसे ही स्वर्ग के देवता भी हैं। वहाँ भी कर्म नहीं हो सकता, भक्ति नहीं
हो सकती। केवल मानव देह में मनुष्य शरीर, जिसको हम विषय सेवन में बिता
देते हैं अथवा खा - पीकर किसी प्रकार। बेटे से कहते हैं-
बेटा मेरी तो बीत गई अब तुम अपनी फ़िक्र करो। पिता जी आपकी क्या बीत गई,
देखो अब सत्तर के हो गये, अस्सी के हो गये, नब्बे के हो गये। पिता जी ! तो
इसके बाद फिर क्या होगा ? भगवान् को प्यारे हो जायेंगे। भगवान् के प्यारे
ऐसे हो जाओगे- साधना तो किया नहीं पूरे जीवन भर बेटे की साधना की, बाप की,
माँ की, बीबी की, पति की, इनकी भक्ति की और मरने के बाद क्या आशा कर रहे हो
गोलोक, बैकुण्ठ मिलेगा। जिसमें प्यार होता है मरने के बाद उसी की प्राप्ति
होती है। यदि तुम हरि गुरु से प्यार करते हो तो उनका लोक मिलेगा और यदि
तुम बाप, बेटे, माँ, पति, बीबी, इनसे प्यार करते हो तो ये कुत्ता , बिल्ली ,
गधा बनेंगे तो तुमको भी वही योनि मिलेगी। बड़ी सीधी सी बात है।
----- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
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