Friday, December 23, 2016

एक वाक्य तुम लोग आपस में सहन नहीं कर सकते । क्या चीज़ है तुम लोगों के पास अहंकार की, जो सहन नहीं कर सकते किसी ने एक वाक्य कहा भी तो चुप हो जाओ, ऐ तुरन्त जबाब । इससे कितना नुकसान हो रहा है तुम लोगों का सोचो, ऐसे ही नुकसान करते जाओगे एक दिन मर जाओगे और कहोगे कि ओ जगद्गुरु कृपालु जी महाराज हमारे गुरु थे और राधारानी का दरबार भी हमको मिला था, और हमने लापरवाही से अपना भविष्य नहीं बनाया, अपना बिगाड़ा कर लिया तो ये आपस में द्वेष करना, दूसरे को दुःखी करना सबसे बड़ा पाप कहा गया है दूसरे को दुःखी करना, ये जानते हुये की सबके हृदय में श्यामसुन्दर बैठे हैं और फिर अपराध करते हो । हम अपनी सहनशीलता को बढावे, दीनता को बढ़ावे, नम्रता को बढ़ावे ये गुण हैं, ईश्वरीय ।
......श्री महाराज जी।

किसी वस्तु में जो हम मन से आइडिया बनाते हैं, उसके कारण सुखी दुखी होते हैं I वो वस्तु हम को मिल जाए ये कामना बनाया I नही मिली दुखी हुए I कामना ना बनाते आराम से बैठे थे कोई परेशानी नही I कोई संसार की वस्तु पुरुष हो स्त्री हो सामान हो यह हमको मिल जाए यह आइडिया बनाया कि दुख शुरू हो गया I और अगर वो आइडिया ना बनता तो आराम से बैठा रहता संसार हो हमारी बला हो हम को करना क्या है I तो हमने जो भावना बनाया उस भावना के कारण हम सुखी दुखी होते हैं I एक लड़की है I एक ने सहेली बनाया एक ने बेटी बनाया एक ने बहन बनाया एक ने बीबी बनाया एक लड़की को I अब जिसने बीबी बनाया वो लड़की को ले के चला गया अपने घर I अब जो अपने घर चला गया तो बाकी लोग रोने लगे I माँ रोने लगी बाप रोने लगा भाई रोने लगा सहेली रोने लगी I अरे तुम जा रही हो तुम जा रही हो क्यो मैं क्या जाती ना तुमको नही मालूम था की मैं जाऊँगी मेरा ब्याह होगा I मालूम तो था लेकिन फिर भी I क्या फिर भी अगर कोई बात पहले से मालूम है तो परेशानी की क्या बात है यह तो स्वाभाविक रोज़ हो रहा है सब जगह हो रहा है I लेकिन मैने ये भावना बनाया था की ये मेरी सहेली है इससे बात करने में अच्छा लगता है सुख मिलता है तुझको देखने में सुख मिलता है तुझसे प्यार करने में सुख मिलता है I ये जो तुम्हारे मन की बनाई हुई दुनिया है उस लड़की के प्रति वो तुम्हे दुखी कर रही है लड़की तो बिचारी एक है उसको क्या मतलब एक सुखी हो रहा है उसका पति बाकी लोग दुखी हो रहे हैं I अब वो सुख दुख जो मिल रहा है किसी को अपने पर्सनल आइडिया के कारण मिल रहा है , लड़की में ना सुख है ना दुख है लड़की से क्या मतलब है वो तो एक लड़की है भगवान की बनाई हुई एक वस्तु है I तो भगवान की बनाई हुई वस्तु मिथ्या नही है वो सत्य है I उसमे जो हम आइडिया बनाते है उसके कारण हम लोगों को सुख- दुख मिला करता है I और जिसने कोई आइडिया कही नही बनाया उसी को महात्मा कहते है परमहंस है I उसको कोई दुख नही मिला I क्योंकि वो जानता है की यह समान सब सरकारी है I यह संसार सरकारी है I सरकारी समान को अपना समान कहना या मानना जुर्म है I और ऐसे सरकार के समान को जो सर्वान्तर्यामी है ,आपने सोचा नियत खराब किया नोट हो गया I ना गवाही की ज़रूरत है ना कोई मुक़दमे की ज़रूरत है I दुनियावी गवर्नमेंट का अगर कोई रुपया गबन करता है कोई खजांची कोई बैंक का आदमी कोई अपने किसी ऑफीस का आदमी , तो देखो वही नही भाग पाता कही लेकिन वो भाग भी जाए मान लो पर ईश्वरीय गवर्नमेंट की चोरी करने वाला कैसे बचेगा I
----- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज।

Friday, December 2, 2016

कोई हो पापात्मा हो, पुण्यात्मा हो,स्त्री हो, पुरुष हो, नपुंसक हो,जो भी मुझसे प्यार कर ले।कुछ भी मान के प्यार कर ले। फिर कोई कर्म करे,उसको पाप पुण्य छू नहीं सकता।और अर्जुन!अगर कोई ये सोचे कि मैंने तो शास्त्र-वेद पढ़ा नहीं,
नहीं तो मैं जल्दी भगवत्प्राप्ति कर लेता।
अरे—नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया।

मैं वेदाध्ययन वगैरह से,पण्डिताई से नहीं मिलता। उससे तो और दूर हो जाता हूँ।
क्योंकि उसमें अहंकार हो जाता है।

भक्त्या त्वनन्यया शक्य अहमेवंविधोऽर्जुन।
(११-५३, ११-५४)

केवल भक्ति से मिलता हूँ।
------- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
तुम बुद्धि को स्थिर करो तथा यह सोचा करो कि मैं शरीर नहीं आत्मा हूँ और वह भी अपने प्रेमास्पद की ही हूँ , उनके लिए ही हूँ। सदा यही सोचो कि मैं संसार की नहीं , मैं तो गोलोक वाले की हूँ। मुझे संसार अपने अन्डर में नहीं कर सकता। मैं मायिक धोखों के चक्कर में नहीं आऊँगी। सदा अपने प्रेमास्पद की कृपा पर बलिहार जाओ।
!!!!! जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाप्रभु !!!!!

पिया बिनु, उठति हूक हिय हाय |
साँवरि सूरति, मोहिनि मूरति, मो मन गई समाय |
अब मोहिं भूषन, अशन, वसन कछु, सपनेहुँ नाहिं सुहाय |
पुनि पुनि कोउ मूठि सी मारत, मोते सह्यो न जाय |
ज्यों – ज्यों हौं विसरावति त्यों त्यों, अधिक अधिक सुधि आय |
लखि ‘कृपालु’ प्राणाधिक – प्रियतम, प्राणहुँ तजि न सकाय ||

भावार्थ – ( प्यारे श्यामसुन्दर के वियोग में श्री किशोरी जी की दु:खद अवस्था |)
प्रियतम श्यामसुन्दर के बिना, हाय ! हाय !! मेरे हृदय में बार – बार हूक सी उठ रही है | प्रियतम की मनमोहिनी साँवरी रूप – माधुरी मेरे मन में समा गयी है | अब मुझे वस्त्र, भोजन एवं गहने आदि स्वप्न में भी अच्छे नहीं लगते | बार – बार मानो कोई मूठ – सी मारता है | मुझसे अब यह दु:ख सहा नहीं जाता | मैं जितना ही प्रियतम को भुलाना चाहती हूँ उतना ही उनका और भी अधिक स्मरण होता है | ‘श्री कृपालु जी’ के शब्दों में किशोरी जी कहती हैं कि प्राण से भी अधिक प्यारे श्यामसुन्दर हैं, अतएव उनके मधुर – मिलन की आकांक्षा में मेरे लिए प्राणों को छोड़ना भी असम्भव हो गया है |

( प्रेम रस मदिरा मान - माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति
एक कल गया,एक आज जा रहा है और एक उसको लेकर जा रहा है शमशान घाट तक, राम नाम सत्य है और फिर भूल गया लौटते समय कि संसार सत्य है और प्लानिंग कर रहा है करोड़पति बनने की ये सबसे बड़ा आश्चर्य है कि बचे हुए लोग अपने लिये नहीं सोचते कि हम भी किसी भी क्षण जा सकते हैं। अपराध से बचें,हरि-गुरु का चिंतन करें। लापरवाही छोड़े।

राम नाम सब सत्य कह,जब लौं जात मसान।
लौटत ही पुनि जगत केंह,सत्य मान धनि ज्ञान।।


--------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

Devotion is the most powerful spiritual practice. It destroys unauspiciousness of past karmas & creates auspiciousness by cleansing the mind.

भक्ति सबसे शक्तिशाली आध्यात्मिक साधना है । वह पूर्व कर्मों के अशुभ संस्कारों को नष्ट करके मन को शुद्ध करती है तथा नवीन शुभ संस्कारों की रचना करती है ।

......जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...