Friday, December 2, 2016

कोई हो पापात्मा हो, पुण्यात्मा हो,स्त्री हो, पुरुष हो, नपुंसक हो,जो भी मुझसे प्यार कर ले।कुछ भी मान के प्यार कर ले। फिर कोई कर्म करे,उसको पाप पुण्य छू नहीं सकता।और अर्जुन!अगर कोई ये सोचे कि मैंने तो शास्त्र-वेद पढ़ा नहीं,
नहीं तो मैं जल्दी भगवत्प्राप्ति कर लेता।
अरे—नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया।

मैं वेदाध्ययन वगैरह से,पण्डिताई से नहीं मिलता। उससे तो और दूर हो जाता हूँ।
क्योंकि उसमें अहंकार हो जाता है।

भक्त्या त्वनन्यया शक्य अहमेवंविधोऽर्जुन।
(११-५३, ११-५४)

केवल भक्ति से मिलता हूँ।
------- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
तुम बुद्धि को स्थिर करो तथा यह सोचा करो कि मैं शरीर नहीं आत्मा हूँ और वह भी अपने प्रेमास्पद की ही हूँ , उनके लिए ही हूँ। सदा यही सोचो कि मैं संसार की नहीं , मैं तो गोलोक वाले की हूँ। मुझे संसार अपने अन्डर में नहीं कर सकता। मैं मायिक धोखों के चक्कर में नहीं आऊँगी। सदा अपने प्रेमास्पद की कृपा पर बलिहार जाओ।
!!!!! जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाप्रभु !!!!!

पिया बिनु, उठति हूक हिय हाय |
साँवरि सूरति, मोहिनि मूरति, मो मन गई समाय |
अब मोहिं भूषन, अशन, वसन कछु, सपनेहुँ नाहिं सुहाय |
पुनि पुनि कोउ मूठि सी मारत, मोते सह्यो न जाय |
ज्यों – ज्यों हौं विसरावति त्यों त्यों, अधिक अधिक सुधि आय |
लखि ‘कृपालु’ प्राणाधिक – प्रियतम, प्राणहुँ तजि न सकाय ||

भावार्थ – ( प्यारे श्यामसुन्दर के वियोग में श्री किशोरी जी की दु:खद अवस्था |)
प्रियतम श्यामसुन्दर के बिना, हाय ! हाय !! मेरे हृदय में बार – बार हूक सी उठ रही है | प्रियतम की मनमोहिनी साँवरी रूप – माधुरी मेरे मन में समा गयी है | अब मुझे वस्त्र, भोजन एवं गहने आदि स्वप्न में भी अच्छे नहीं लगते | बार – बार मानो कोई मूठ – सी मारता है | मुझसे अब यह दु:ख सहा नहीं जाता | मैं जितना ही प्रियतम को भुलाना चाहती हूँ उतना ही उनका और भी अधिक स्मरण होता है | ‘श्री कृपालु जी’ के शब्दों में किशोरी जी कहती हैं कि प्राण से भी अधिक प्यारे श्यामसुन्दर हैं, अतएव उनके मधुर – मिलन की आकांक्षा में मेरे लिए प्राणों को छोड़ना भी असम्भव हो गया है |

( प्रेम रस मदिरा मान - माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति
एक कल गया,एक आज जा रहा है और एक उसको लेकर जा रहा है शमशान घाट तक, राम नाम सत्य है और फिर भूल गया लौटते समय कि संसार सत्य है और प्लानिंग कर रहा है करोड़पति बनने की ये सबसे बड़ा आश्चर्य है कि बचे हुए लोग अपने लिये नहीं सोचते कि हम भी किसी भी क्षण जा सकते हैं। अपराध से बचें,हरि-गुरु का चिंतन करें। लापरवाही छोड़े।

राम नाम सब सत्य कह,जब लौं जात मसान।
लौटत ही पुनि जगत केंह,सत्य मान धनि ज्ञान।।


--------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

Devotion is the most powerful spiritual practice. It destroys unauspiciousness of past karmas & creates auspiciousness by cleansing the mind.

भक्ति सबसे शक्तिशाली आध्यात्मिक साधना है । वह पूर्व कर्मों के अशुभ संस्कारों को नष्ट करके मन को शुद्ध करती है तथा नवीन शुभ संस्कारों की रचना करती है ।

......जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

हमारो दोउ ठाकुर श्यामा श्याम।
करत नित लीला नित्य धाम।
विराजें नित श्यामा श्याम धाम।
लखत बड़भागिनि ब्रज की बाम।
रटो नित छिन छिन इनको नाम।
करो इन सुमिरन आठों याम।
पतित पावन दोउ श्यामा श्याम।
'कृपालुहिं' हाथन लेहु थाम।।
------ जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
प्रिय मेम्बर्स.....! जय श्री राधे।

आप सभी मित्रों का जो प्यार एवं आशीर्वाद हमको प्राप्त हो रहा है उसके लिए आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूँ। आप लोग जिस तरह से इतनी भारी संख्या में श्री महाराजजी की हर पोस्ट को लाइक कर रहे हैं,comments लिख रहे हैं ,उसको देखके मन गदगद हो जाता है,और लगता है हम लोग और मेहनत करें जिससे श्री गुरुदेव का ये दिव्य ज्ञान और तेजी से दसों दिशाओं में फैले।
मेरे प्रति तो आप सभी का प्यार शुरू से विशेष ही रहा है। आपका प्यार ही मेरी ताकत है। अगर आप सभी मेरा साथ नहीं देते तो शायद मैं भी टूट जाता। मैं आप सभी के प्यार,आशीर्वाद ,सहयोग का सदा ही ऋणी रहूँगा,क्योंकि आप ने जो प्यार दिया है वो अनमोल है। उसको शब्दों में बयान करना असंभव है।
कितना बड़ा एवं शुद्ध हृदय है आप लोगों का,कितना ज्यादा प्यार आप श्री महाराजजी से करते हैं जो मुझ जैसे तुच्छ जीव पर भी इतना प्यार बरसा रहे हैं।
आजके युग में नहीं तो भक्ति के अलावा इंसान के पास हर चीज के लिए समय है। नक़ली मिथ्या जीवन जीने वाले ये लोग internet तक का गलत उपयोग कर रहे हैं,बेचारे अशांत हैं,अतृप्त हैं,संसार को रिझा रहे हैं, इन मूर्खों के पास भगवान के लिए समय ही नहीं है। जो संसार दिन रात जूते चप्पल मार रहा है उसीको ख़ुश करने में लगे हुए हैं। आश्चर्य है कि दिन रात इतने जूते चप्पल खाने के बाद भी इन का रूझान भगवान में नहीं होता, ये अच्छा बनना नहीं चाहते,अच्छा कहलवाना चाहते हैं, अरे! संसार तो अच्छे को कभी अच्छा नहीं कह सकता तुमको क्या अच्छा कहेगा। और एक तरफ आप लोग हैं जो इतना समय social media पर श्री महाराजजी के लिए निकाल रहे हैं,आप सभी विशेष बधाई के पात्र हैं। हमारे द्वारा संचालित सभी ग्रुप्स/pages को आपका जो अनवरत सहयोग मिल रहा है उसके लिए हम आपके सदा आभारी रहेंगे।

कुछ लोगों को आपके इस प्यार एवं सहयोग से मेरे से allergy भी हो रही है। वोलोग किसी भी तरह ये सहन नहीं कर पाते कि सारा प्यार 'शरद भैया' को ही क्यों मिलता है,तो उनको मैं बता दूँ कि आप सभी भी निरंतर मेहनत कीजिये, एक दिन में आप 'शरद' नहीं बन जायेंगे। आज से 6 साल पहले श्री महाराजजी का नाम भी social media पर कोई नहीं जानता था,थोड़ा बहुत प्रचार था वो भी बिलकुल अव्यवस्थित रूप में ,मेरे इस mission के पीछे मेरी एवं टीम की 6 साल की मेहनत है और आप लोग एक ही दिन में सब कुछ प्राप्त कर लेना चाहते हैं। आप लोगों को तो बल्कि अच्छा खासा प्लैटफ़ार्म हमने ready करके दे दिया है ,जो परेशानियाँ हमने face की वो आपको अब नहीं करनी पड़ रही है, इसलिए धैर्य रखिये,ईर्ष्या को त्यागिये, ये भी आप में से अधिकांश जानते ही हैं,भले ही मानते न हो कि इन्ही ग्रुप्स/pages से आपको श्री महाराजजी के social media पर प्रचार की प्रेरणा मिली है,जब आप सभी यहाँ की सारी ही नकल करते हैं तो मेहनत में भी कृपया नकल कीजिये। आपको भी प्यार मिलने लगेगा।
आने वाले वर्षों में तो हमारे परम-पूज्य श्री महाराजजी द्वारा प्रगटित ये दिव्य ज्ञान वैसे ही घर-घर में जाना-माना जायेगा। युगों-युगों तक सज्जन पुरुषों का,अधिकारी जीवों का मार्गदर्शन करता रहेगा।
इसलिए सभी मित्रों से विनती है कि अधिक से अधिक संख्या में हमसे जुड़िये,और अपने मित्रों को, रिश्तेदारों को श्री महाराजजी के बारे में बताइये,जैसा लाभ आप सभी को मिल रहा है उनतक भी अवश्य ये लाभ पहुँचना चाहिए। कोई भी इस दिव्य ज्ञान से वंचित न रह जाये। सभी खूब प्रचार-प्रसार कीजिये।
पुन: आप सभी को आपके प्यार,सहयोग,आशीर्वाद के लिए कोटि-कोटि हार्दिक नमन। आपका ये प्यार ही मेरी ताकत है। आपकी सेवा हमेशा की भाँति जारी रहेगी,बल्कि ओर ज़ोर-शोर से हम हमारे प्राण प्रिय गुरुदेव 'जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज' की ये दिव्य वाणी,ये philosophy आप तक पहुंचाते रहेंगे। नीचे फ़ोटो मैं मेरे द्वारा श्री महाराजजी के प्रचारार्थ संचालित सभी web links दिये जा रहे हैं,इनमें आप लोगों को जोड़िये,यही करबद्ध निवेदन है। सभी इस क्रांति में अपना-अपना सहयोग प्रदान करें,यही आपके इस भाई की आपके चरणों में विनती हैं,आशा है आप निराश नहीं करेंगे।

सभी मेम्बर्स को पुन:कोटि-कोटि नमन एवं हार्दिक आभार।
जय श्री राधे।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...