Wednesday, February 8, 2017

श्रीधरी दीदी द्वारा जगद्गुरु कृपालु परिषत की अध्यक्षा डा० विशाखा त्रिपाठी (बड़ी दीदी) के पावन जन्मदिवस के उपलक्ष्य में बधाई संदेश:
श्री कृपालु महाप्रभु चरणानुरागी भक्तवृंद !
आप सभी को हमारी परमप्रिय, परम आदरणीया ज्येष्ठा गुरुपुत्री डा॰ विशाखा त्रिपाठी ( बड़ी दीदी ) जी के पुनीत जन्मदिवस की हार्दिक बधाई ।
हमारे परम पूज्य गुरुवर जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ने अपनी तीनों भगवत्परायणा सुपुत्रियों के रूप में जो अनमोल त्रिरत्न हमें प्रदान किये हैं, उनकी इस कृपा के लिए समस्त साधक समुदाय श्री महाराज जी का ऋणी है।
क्योंकि आज श्री महाराज जी की प्रत्यक्ष अनुपस्थिति में गुरु भक्ति की आदर्श स्वरुपा, इन्हीं तीनों JKP की अध्यक्षाओं के संरक्षण में ही सभी साधक पूर्ववत् श्री महाराज जी की दिव्य उपस्थिति का, उनकी कृपाओं का अनुभव करते हुए, गुरुधाम इत्यादि में जाकर गुरुनिर्दिष्ट साधना का पूर्ण लाभ ले रहे हैं ।
और भक्ति त्रिवेणी रूपी तीनों दीदीयों में भी भगवती गंगा स्वरुपा सिरमौर हैं हमारी प्यारी बड़ी दीदी जो भक्तिधाम मनगढ़ की अध्यक्षा हैं, जिनकी प्रत्येक आज्ञा का पालन स्वयं मंझली दीदी ( सुश्री डा॰ श्यामा त्रिपाठी ) व छोटी दीदी ( सुश्री डा॰ कृष्णा त्रिपाठी ) भी परम आदरपूर्वक करती हैं ।
देवनदी के समान ही शुभ्रवर्णी बड़ी दीदी अपने उज्ज्वल स्वरुप से हटात् सभी का मन मोह लेती हैं । और सभी साधकों को अपने ममतामयी आँचल की छाया प्रदान करके, प्यार – दुलार देकर गंगा मैया के शीतल सुखद स्पर्श सा ही सुख प्रदान करती हैं । इनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य गुरुसेवा ही है ।
श्री महाराज जी के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करना, उनकी महिमा को जगत में प्रकाशित करने के लिए नये प्रोजेक्ट्स का निर्माण, विभिन्न साधना शिविरों का आयोजन, येन केन प्रकारेण समस्त साधकों को श्री महाराज जी के सिद्धांतों के अनुकरण हेतु प्रेरित करना, विभिन्न लीलाओं के मंचन, ऑडियो – विडियो इत्यादि के माध्यम से श्री महाराज जी के सिद्धांत ज्ञान का प्रचार करना, हरि गुरु के विभिन्न विग्रहों एवं झांकियों के निर्माण के माध्यम से साधकों की भगवद्भावना को द्विगुणित करना, विभिन्न पर्वों के माध्यम से श्री महाराज जी की दिव्य उपस्थिति का अनुभव करवाना, श्री महाराज जी द्वारा संचालित समस्त जनकल्याणकारी योजनाओं का विस्तार करना बस यही सब दैवीय कार्य उनकी दिनचर्या के प्रमुख अंग हैं ।
बड़ी दीदी के नाम के अनुरूप ही उनके समस्त कार्य भी बड़े – बड़े होते हैं ।
भगवती भागीरथी रूपी दीदी के भगीरथ प्रयत्नों के लिए अनेक अवार्ड्स भी उन्हें प्राप्त हुए हैं ।
हम सभी परम सौभाग्यशाली हैं जो ऐसी ममतामयी दीदी का सहज सान्निध्य हमें प्राप्त है । आज बड़ी दीदी के पुनीत जन्मदिवस के उपलक्ष्य में ,मैं समस्त साधकों की ओर से उनके चरण कमलों में बारम्बार प्रणाम करती हूँ ।
और समस्त साधकों से निवेदन करती हूँ कि गुरु सेवा का दृढ़ संकल्प लेकर उनके जन्मदिवस को सार्थक बनायें क्योंकि यही बड़ी दीदी के लिए सर्वोपरि उपहार है, यही उनकी अभिलाषा है कि हर साधक का जीवन एकमात्र गुरुसेवा में ही व्यतीत हो, इसी में उनकी सर्वाधिक प्रसन्नता है ।
अतएव आइये इस स्वर्णिम अवसर पर अपने मानव जीवन को सफल बनाने के लिए हम सभी श्री महाराज जी के चरणों में यही प्रार्थना करें –
भुक्ति ना दे मुक्ति ना दे वैकुण्ठ ना दे ।
गुरु सेवा में ही मेरा जन्म बिता दे ।।
एक बार पुन: समस्त कृपालु परिवार को हमारी प्यारी – प्यारी बड़ी दीदी के जन्मदिवस की बड़ी – बड़ी बधाईयाँ व शुभकामनायें ।
आपकी दीदी
श्रीधरी

Saturday, February 4, 2017

भगवान् तथा महापुरुष शुद्ध शक्ति हैं। महापुरुष का संग सांसारिक हानि सहकर भी करना श्रेयस्कर है। महापुरुष भले ही प्रेमयुक्त व्यवहार करें , उदासीन रहें अथवा विपरीत व्यवहार ही क्यों न करें । सबमें हमारा कल्याण है।
--------सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका),जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।


क्षण क्षण हरि गुरु स्मरण में ही व्यतीत करो। पल पल मृत्यु की और बढ़ रहे हो और संसार में बेहोश हो

  ------सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका), जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।

साधक को अपनी शरणागति पर ध्यान देना चाहिए।वैसे आप लोगों को लगता है कि हम पूर्ण शरणागत हैं लेकिन वस्तुतः ऐसा है नहीं। छोटी सी भी बात आप से कही जाती है, आपका तुरंत उत्तर होता है - नहीं हमने तो ऐसा नहीं किया अथवा ऐसा किया तो नहीं था न जाने कैसे हो गया? बाहर से आप मान भी लें लेकिन भीतर से अपनी गलती स्वीकार नहीं करते। गुरु आपके अन्दर की बात नोट करते हैं, वह परीक्षा भी लेता है। और साधक परीक्षा में फेल हो गया तब भी गुरु बारम्बार परीक्षा लेना बंद नहीं करता।जिस कक्षा का जीव है उसी कक्षा का परचा उसको दिया जाता है, अगर आप परीक्षा देने से घबराएंगे तो आप कभी भी भगवद प्राप्ति नहीं कर सकेंगे। इस प्रकार बार-बार परीक्षा देते हुए हमें शरणागति को पूर्ण करना है।
------सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका), जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।"
The Guru imparts spiritual knowledge, removes the darkness of ignorance and guides you towards the attainment of your supreme goal. Living in the association of a Saint for some time, if you find yourself more deeply attached to God and detached from the world, this is the surest proof that he is a God-realised soul. You could never have imagined giving so much time to devotion of God. It was only made possible due to the grace of your Guru. You should always realise the grace of your Guru to be instrumental in your spiritual progress.
--------JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
Devotion is the most powerful spiritual practice. It destroys unauspiciousness of past karmas & creates auspiciousness by cleansing the mind.
भक्ति सबसे शक्तिशाली आध्यात्मिक साधना है । वह पूर्व कर्मों के अशुभ संस्कारों को नष्ट करके मन को शुद्ध करती है तथा नवीन शुभ संस्कारों की रचना करती है ।
......जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।


श्री महाराजजी से प्रश्न: संसार में भी तो स्त्री-पति आदि में प्रेम देखा जाता हैं। तो अंतर क्या हैं?
Ans:- संसार में कोई व्यक्ति किसी से इसलिए प्रेम नहीं कर सकता क्योंकि प्रत्येक जीव स्वार्थी है। वह आनंद चाहता है। अस्तु, लेने-लेने की भावना रखता है। जब दोनों पक्ष लेने-लेने की घात में है तो मैत्री कितने क्षण चलेगी? तभी तो स्त्री-पति,बाप-बेटे में दिन में दस बार टक्कर हो जाती है। जहाँ दोनों लेने-लेने के चक्कर में हैं, वहाँ टक्कर होना स्वाभाविक है।
कामना 'प्रेम' का विरोधी तत्त्व है। लेने-लेने का नाम कामना है, एवम् देने-देने का नाम प्रेम है, तथा लेने-देने का नाम व्यापार है। जिसमें प्रेमास्पद से कुछ याचना की भावना हो, वह प्रेम नहीं है। जिसमें सब कुछ देने पर भी तृप्ति न हो, वही 'प्रेम' है।
ब्रज देवियों का प्रेम इस प्रकार था कि जिस प्रकार भी श्रीकृष्ण प्रसन्न रहें, वही वे सब करती थी।

------ श्री महाराज जी ।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...